LAW'S VERDICT

नर्मदा नदी पर संकट गहराया: याचिकाकर्ता बोली- समाज और प्रशासन को साथ आने की जरूरत

जबलपुर | पवित्र नर्मदा नदी में बढ़ते प्रदूषण को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट के निर्देश पर याचिकाकर्ता विनीता आहूजा ने अपने सुझाव देकर कहा है कि अगर समाज और प्रशासन ने मिलकर ठोस कदम नहीं उठाए, तो नर्मदा को बचाना बेहद मुश्किल हो जाएगा।

शनिवार को चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सभी पक्षों से याचिकाकर्ता द्वारा दिए गए सुझावों पर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 12 मई को तय की गई है।

लॉ स्टूडेंट ने भेजी थी चिट्ठी 

नालों के गंदे पानी से उगाई जा रही सब्जियों के मुद्दे को उठाते हुए लॉ स्टूडेंट समर्थ बघेल ने चीफ जस्टिस को पत्र भेजा था, जिसे जनहित याचिका के रूप में स्वीकार किया गया। इसके बाद डेमोक्रेटिक लॉयर्स फोरम और अधिवक्ता विनिता आहूजा ने भी नर्मदा प्रदूषण के खिलाफ अलग-अलग याचिकाएं दायर कीं।

क्या हैं याचिकाकर्ता के बड़े सुझाव?

1. नालों को नदी तक पहुंचने से पहले रोकें
नर्मदा को सबसे बड़ा खतरा बिना ट्रीटमेंट के सीधे गिरते सीवेज से बताया गया है। सुझाव है कि नालों को नदी से 50–200 मीटर पहले ही इंटरसेप्ट कर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की ओर मोड़ा जाए। इससे बड़े स्तर पर प्रदूषण रोका जा सकता है। इंदौर, सूरत और नागपुर जैसे शहरों में यह मॉडल सफल रहा है।

2. घाटों की बदहाली पर तत्काल कार्रवाई
घाटों की सफाई केवल त्योहारों तक सीमित रहने पर चिंता जताई गई। सुझाव दिया गया कि रोजाना सफाई, हर 20–30 मीटर पर डस्टबिन, फ्लोटिंग कचरा मशीन और निगरानी के लिए वालंटियर तैनात किए जाएं। इसे धार्मिक नहीं, बल्कि नगर निगम की नियमित जिम्मेदारी बनाया जाए।

3. जनजागरूकता और व्यवहार में बदलाव
नर्मदा में कचरा डालना अपराध है—इस संदेश के साथ व्यापक अभियान चलाने की जरूरत बताई गई। इसे स्वच्छ भारत मिशन जैसी योजनाओं से जोड़ने पर भी जोर दिया गया।

4. सख्त कानूनी कार्रवाई जरूरी
होटल, उद्योग और घरों से गंदगी छोड़ने वालों पर भारी जुर्माने का सुझाव दिया गया है। साथ ही मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी सक्रिय भूमिका निभाने की बात कही गई।

5. दूध बहाने पर रोक और वैज्ञानिक समाधान
हाल ही में नर्मदा में बड़ी मात्रा में दूध बहाने का मामला सामने आया था। वैज्ञानिकों के अनुसार इससे पानी में ऑक्सीजन की खपत बढ़ती है, जो जलीय जीवन के लिए खतरनाक है। समाधान के रूप में घाटों पर कलेक्शन टैंक बनाकर प्रतीकात्मक अर्पण की व्यवस्था सुझाई गई है।

अदालत का रुख साफ

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी ने दलीलें रखीं, जबकि अन्य पक्षों ने अतिरिक्त रिपोर्ट आने के बाद जवाब देने की बात कही। हाईकोर्ट का यह रुख साफ दर्शाता है कि अब नर्मदा प्रदूषण को लेकर केवल चिंता नहीं, बल्कि ठोस और सामूहिक कार्रवाई की जरूरत है। 

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