LAW'S VERDICT

मप्र हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: गैंगरेप केस में ‘मदद’ करना भी अपराध

घटना में सहयोग देने वाले आरोपी की जमानत अर्जी हाईकोर्ट से ख़ारिज, वीडियो पहचान बनी आधार

जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने नरसिंहपुर जिले के चर्चित गैंगरेप मामले में आरोपी की पहली जमानत अर्जी खारिज करते हुए दो टूक कहा कि जघन्य अपराधों में “सिर्फ मदद” का तर्क राहत पाने के लिए पर्याप्त नहीं है। ऐसे संगीन मामलों में किसी भी प्रकार का सहयोग देना भी अपराध ही है। जस्टिस जीएस अहलूवालिया की कोर्ट ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति साझा मंशा (common intention) से अपराध में शामिल है, तो वह भी समान रूप से जिम्मेदार माना जाएगा।

बकोरी के जंगल में हुआ था गैंगरेप 

यह मामला नरसिंहपुर के थाना मुंगवानी में दर्ज अपराध से जुड़ा है। बकौरी में रहने वाले आरोपी रामलाल ठाकुर पर आरोप है कि वह एक नाबालिग आदिवासी को आरोपी अन्नू उर्फ़ अनुराग के कहने पर अपनी गाडी से बकौरी के जंगल में स्थित बंद स्टोन क्रेशर में ले गया। वहां पर आरोपी अन्नू उर्फ़ अनुराग, गणेश ठाकुर और ओमप्रकाश उर्फ़ पंचु ठाकुर ने पीड़िता के साथ गैंगरेप किया। इसके दौरान आरोपियों ने पीड़िता का वीडियो भी बनाया। 

आरोपी का दावा- मैंने दुष्कर्म नहीं किया 

इस मामले में 31 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किये गए आरोपी रामलाल ठाकुर ने जमानत पाने हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। उसकी ओर से कोर्ट में दलील दी कि मुख्य आरोप अन्य सह-आरोपियों पर हैं और उसके खिलाफ केवल सहयोग (assistance) का आरोप है। साथ ही FIR में देरी, नाम का उल्लेख न होना और पहचान परेड न होने जैसे बिंदुओं को भी आधार बनाया गया। यह आधार भी लिया गया कि अन्य आरोपियों को जमानत मिल चुकी है।

वीडियो बना सबसे बड़ा सबूत

राज्य सरकार की ओर से पुब्लिक प्रासीक्यूटर स्वाति जॉर्ज ने कोर्ट को बताया कि घटना का वीडियो स्वयं एक सह-आरोपी ने बनाया था। इसी वीडियो में आरोपी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। पीड़िता ने भी इसी वीडियो के आधार पर आरोपी की पहचान की। इस दलील को अदालत ने बेहद महत्वपूर्ण साक्ष्य माना।

गैंगरेप में दुष्कर्म करना जरूरी नहीं: कोर्ट 

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि गैंगरेप के मामलों में हर आरोपी द्वारा दुष्कर्म करना आवश्यक नहीं है। यदि कोई व्यक्ति अपराध में सक्रिय रूप से शामिल है या सहयोग करता है, तो वह भी समान रूप से दोषी है। वीडियो के आधार पर की गई पहचान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने माना कि आरोपी की पहचान प्रथम दृष्टया स्थापित है और उसके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं।

जमानत अर्जी हुई खारिज

इन सभी तथ्यों के आधार पर अदालत ने कहा कि यह मामला जमानत के योग्य नहीं है। जमानत अर्जी खारिज करते हुए कोर्ट ने संकेत दिया कि ऐसे गंभीर और जघन्य अपराधों में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी।

हाईकोर्ट का आदेश देखें MCRC-14267-2026

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