LAW'S VERDICT

9 महीने के भीतर इंदौर के टॉप 5 थानों में सभी पुलिसकर्मियों को दिए जाएं बॉडी कैमरे

मप्र हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, हिरासत में पिटाई पर लसूड़िया थाना पुलिस का ₹10 हजार का मुआवजा देने के आदेश 

इंदौर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने इंदौर के लसूड़िया थाना क्षेत्र में कथित कस्टोडियल वायलेंस (हिरासत में पिटाई) के मामले में पुलिस पर कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की कोर्ट ने पीड़ित को ₹10,000 मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि थाने में CCTV फुटेज का न होना “स्वाभाविक नहीं” है और इससे आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्रतिकूल अनुमान (adverse inference) बनता है। अदालत ने 9 महीनों के भीतर लसूड़िया थाने में सभी पुलिसकर्मियों को बॉडी कैमरे देने के आदेश दिए हैं।

हिरासत में पिटाई का है मामला

याचिकाकर्ता हर्ष ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करके पुलिस कर्मियों द्वारा की गई पिटाई को चुनौती दी थी। युवक का आरोप था कि 29 दिसंबर 2025 की रात इंदौर के बॉम्बे स्क्वायर स्थित एक रेस्टोरेंट पर विवाद के बाद पुलिसकर्मियों ने उसे और उसके दोस्तों को बिना वजह पीटा। उसका मोबाइल छीना और थाने ले जाकर करीब डेढ़ घंटे तक मारपीट की। इसके बाद बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के उन्हें छोड़ दिया गया। 

CCTV पर बड़ा सवाल

कोर्ट ने थाने के वीडियो फुटेज देखकर पाया कि घटना की रात 2:41 AM से 2:45 AM के बीच याचिकाकर्ता को ऐसे हिस्से में ले जाया गया जहां CCTV कैमरा नहीं था। बैकग्राउंड में मारपीट की आवाजें भी सुनाई दे रही हैं। अदालत ने कहा कि यह स्थिति “चौंकाने वाली” है और इससे याचिकाकर्ता के आरोप मजबूत होते हैं।

बॉडी कैमरों पर भी फटकार

राज्य की ओर से बताया गया कि इंदौर पुलिस के पास 442 बॉडी-वॉर्न कैमरे हैं, लेकिन लसूड़िया थाने को केवल 2 कैमरे ही मिले है। उनका उपयोग भी सिर्फ ट्रैफिक ड्यूटी में होता है। कोर्ट ने इसे “पब्लिक संसाधनों की आपराधिक बर्बादी” करार दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के थानों में CCTV लगाने संबंधी निर्देशों का भी पालन नहीं किया गया है।

मुआवजा और फुटेज सुरक्षित रखो: कोर्ट  

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सुडील यादव ने दलीलें रखीं। अदालत ने आदेश दिया कि पीड़ित को ₹10,000 मुआवजा दिया जाए। इसके साथ ही घटना से जुड़े CCTV फुटेज और अभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं। 

MP पुलिस के लिए बड़े निर्देश

कोर्ट ने राज्य सरकार को सख्त निर्देश दिए:

  1. CCTV कवरेज अनिवार्य- थाने में आरोपियों को ऐसे स्थान पर न ले जाया जाए जहां कैमरा न हो (टॉयलेट आदि छोड़कर)। 
  2. बॉडी कैमरे अनिवार्य- इंदौर के टॉप 5 थानों में 9 महीने में सभी पुलिसकर्मियों को बॉडी कैमरे दिए जाएं।
  3. SOP तैयार करें- कैमरों के उपयोग और मॉनिटरिंग के लिए स्पष्ट नियम बनें।
  4. इन्फ्रास्ट्रक्चर सुधार- आवश्यक संसाधन और व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।

हाईकोर्ट का आदेश देखें   WP No. 55 of 2026

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