पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की फर्जी खबर वायरल करने के आरोप में भोपाल साइबर क्राइम पुलिस ने किया था गिरफ्तार
जबलपुर। सोशल मीडिया पर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से जुड़ी कथित फर्जी खबर वायरल करने के आरोप में भोपाल से गिरफ्तार तीन युवकों को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की बेंच ने राजस्थान पुलिस को निर्देश दिया है कि तीनों युवकों को अगली सुनवाई (27 अप्रैल) पर कोर्ट के सामने पेश किया जाए। साथ ही भोपाल पुलिस कमिश्नर से पूछा गया है कि गिरफ्तारी के दौरान कौन-सी कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई?
भोपाल साइबर क्राइम से जुड़े इस मामले में तीन युवकों को 20 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि उन्होंने एक न्यूज चैनल की कथित फर्जी न्यूज़ रिपोर्ट सोशल मीडिया पर वायरल की। यह खबर राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से संबंधित थी। तीनो युवकों की गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए तीन अलग-अलग याचिकाएं हाईकोर्ट में दायर की गईं। खिजर खान ने अपने भाई बिलाल खान के लिए, उदय घेनघट ने अपने दोस्त निखिल प्रजापति के लिए और अनाम अहमद ने अपने भाई इनाम अहमद के लिए।
दोनों पक्षों ने रखीं दलीलें
बुधवार को हुई सुनवाई में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता हरजस सिंह छाबड़ा ने और राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता निलेश यादव और ब्रम्हदत्त सिंह उपस्थित हुए। हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए दो बड़े निर्देश दिए:
1. राजस्थान पुलिस को आदेश
- गिरफ्तार किए गए तीनों युवकों को 27 अप्रैल को कोर्ट में पेश किया जाए।
2. भोपाल पुलिस कमिश्नर से जवाब तलब
कोर्ट ने पूछा है कि गिरफ्तारी किस प्रक्रिया के तहत की गई?
सरकार ने मजबूती से रखा पक्ष
राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि जिस न्यूज चैनल की रिपोर्ट वायरल हुई, उसी चैनल की एफआईआर के आधार पर कार्रवाई की गई। मध्यप्रदेश पुलिस ने केवल बीएनएसएस (BNSS) के प्रावधानों के तहत राजस्थान पुलिस की मदद की है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
यह केस कई अहम कानूनी सवाल खड़े करता है:
👉 क्या सोशल मीडिया पर कंटेंट शेयर करना सीधे गिरफ्तारी का आधार बन सकता है?
👉 क्या इंटर-स्टेट मामले में की गई गिरफ्तारी में पूरी प्रक्रिया का पालन हुआ?
👉 क्या गिरफ्तार किये गए युवकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ?
कोर्ट के रुख का मतलब
हाईकोर्ट के इस आदेश से साफ संकेत मिलता है कि:
- गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर कोर्ट का रुख बेहद सख्त है।
- पुलिस को हर कदम कानून के अनुसार ही उठाना होगा।
- बिना उचित प्रक्रिया के गिरफ्तारी पर कोर्ट हस्तक्षेप करेगा।
अब आगे क्या होगा?
अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी, जहां राजस्थान पुलिस को युवकों को पेश करना होगा और भोपाल पुलिस कमिश्नर को भी इस मामले पर की गई कार्रवाई का पूरा ब्यौरा देना होगा। इसके बाद ही तय होगा कि गिरफ्तारी वैध थी या नहीं?
