अवमानना मामले पर हाईकोर्ट का सरकार को दिया अल्टीमेटम
जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश की सीमाओं पर बने इंटर स्टेट चेक पोस्टों को 30 दिनों में शुरू करने के सख्त आदेश दिए हैं। जस्टिस विशाल मिश्रा की बेंच ने सीधा अल्टीमेटम देकर कहा है कि एक बार अंडरटेकिंग देने के बाद सरकार अपने वादे से मुकर नहीं सकती। सरकार यदि ऐसा करती है तो यह अवमानना की श्रेणी में माना जाएगा। अदालत ने याचिकाकर्ता को स्वतंत्रता दी है कि यदि बंद चेक पोस्ट शुरू नहीं होते तो वो नई अवमानना याचिका दाखिल कर सकेगा।
सतना में रहने वाले रजनीश त्रिपाठी की ओर से वर्ष 2025 में दाखिल अवमानना याचिका में कहा गया था कि दूसरे राज्यों से आने वाले ओवरलोडेड ट्रकों के कारण सड़कों को भारी नुकसान होता है और इससे दुर्घटनाओं में वृद्धि हो रही है। इसके कारण पर्यावरण पर दुष्प्रभाव पड़ रहा और सरकारी राजस्व में भी कमी आ रही है। इन मुद्दों को लेकर वर्ष 2006 में दाखिल की गई एक जनहित याचिका पर राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल कर यह भरोसा दिया था कि प्रदेश की सीमाओं पर चेक पोस्ट लगातार संचालित किए जाएंगे और ओवरलोडिंग पर सख्ती से रोक लगेगी। सरकार की ओर से दिए गए इन्हीं आश्वासनों के आधार पर हाईकोर्ट ने 03 जनवरी 2023 को जनहित याचिका का निपटारा कर दिया था।
सरकार ने बंद किये चेक पोस्ट
याचिकाकर्ता के अनुसार, जनहित याचिका का निराकरण होने के बाद सरकार ने 30 जून 2024 को अचानक सभी इंटर-स्टेट चेक पोस्ट बंद करने का आदेश जारी कर दिया। यह कदम इसलिए विवादित हो गया क्योंकि पहले भी 2018 में चेक पोस्ट बंद करने के आदेश को हाईकोर्ट ने स्टे कर दिया था। इसके बावजूद दोबारा वही निर्णय लिया गया। अवमानना याचिका में इसे कोर्ट में दिए गए वादों का उल्लंघन बताया गया।
अंडरटेकिंग का उल्लंघन अवमानना है
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की और से अधिवक्ता जुबिन प्रसाद और भानु प्रकाश हाजिर हुए। सुनवाई के बाद दिए फैसले में हाईकोर्ट ने कहा-
“कोर्ट के समक्ष दिया गया आश्वासन यदि पूरा नहीं किया जाता है, तो वह अदालत के आदेश की अवहेलना माना जाएगा।”
सरकार का जवाब असंतोषजनक
कड़ी चेतावनी के साथ दिया आदेश
हाईकोर्ट ने सरकार को कड़ी चेतावनी के साथ आदेश दिया कि 30 दिनों के भीतर सभी बंद किए गए चेक पोस्ट फिर से चालू किए जाएं और कोर्ट में दिए गए वादों का पालन किया जाए। साथ ही सरकार अन्य तकनीकी या प्रशासनिक उपाय अपना सकती है, लेकिन कोर्ट को दिए गए आश्वासन से पीछे नहीं हट सकती।
चेकपोस्ट शुरू न हुए तो क्या होगा?
कोर्ट ने साफ कर दिया कि अगर 30 दिन में आदेश का पालन नहीं हुआ, तो याचिकाकर्ता को अवमानना याचिका दोबारा शुरू करने की छूट होगी। इसके बाद सम्बंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
क्यों जरूरी हैं चेक पोस्ट?
विशेषज्ञों के अनुसार चेक पोस्ट ही ओवरलोडेड वाहनों की तुरंत जांच का सबसे प्रभावी तरीका हैं। इससे सड़कें सुरक्षित रहती हैं और दुर्घटनाएं भी कम होती हैं।
हाईकोर्ट का आदेश देखें CONC-5447-2025
