दत्तक पुत्र के अधिकारों को हाईकोर्ट ने दी मान्यता, अनुकम्पा नियुक्ति पर फिर से विचार करने के आदेश
SFW के पद पर थे पिता
मंदसौर निवासी मोहित गौड़ ने याचिका दायर कर 10 दिसंबर 2021 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें जिला मलेरिया अधिकारी द्वारा उनके दत्तक पिता स्व. धर्मेंद्र पारिख की मृत्यु के बाद अनुकंपा नियुक्ति देने से इंकार कर दिया गया था। स्व. धर्मेंद्र पारिख मलेरिया विभाग में Superior Field Worker (SFW) के पद पर कार्यरत थे और 29 अप्रैल 2021 को COVID-19 के कारण उनका निधन हो गया।
दत्तक संबंधों पर विवाद
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता रामकृष्ण शास्त्री ने अदालत को बताया कि वर्ष 2010 में याचिकाकर्ता को विधिवत दत्तक लिया गया था। 2020 में गोद लेने का दस्तावेज (adoption deed) तैयार किया गया। याचिकाकर्ता पूरी तरह अपने दत्तक पिता पर निर्भर थे। इसके बावजूद विभाग ने यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया कि गोद लेने का रजिस्टर्ड दस्तावेज मृत्यु से पहले नहीं था और उत्तराधिकार प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किया गया।
रजिस्टर्ड दस्तावेज जरूरी नहीं: हाईकोर्ट
अपने फैसले में हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि हिंदू दत्तक एवं भरण-पोषण अधिनियम, 1956 में रजिस्टर्ड adoption deed अनिवार्य नहीं है। न ही अनुकंपा नियुक्ति नीति (2014) में succession certificate की शर्त है। विभाग ने कानून से परे जाकर अतिरिक्त शर्तें लगाईं। कोर्ट ने यह भी माना कि 2020 का adoption deed यह साबित करता है कि गोद लेना कर्मचारी के जीवनकाल में ही हो चुका था।
विभाग की कार्रवाई ‘मनमानी’ करार
न्यायालय ने कहा कि जिला मलेरिया अधिकारी का आदेश मनमाना (arbitrary) और कानून की गलत व्याख्या पर आधारित था। संबंधित अधिकारी ने “mechanical approach” अपनाया।
हाईकोर्ट ने जिला मलेरिया अधिकारी का 10 दिसंबर 2021 का आदेश रद्द (quash) करके विभाग को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता के आवेदन पर पुनर्विचार किया जाए। दत्तक संबंध को वैध माना जाए और 60 दिनों के भीतर नियुक्ति संबंधी निर्णय लिया जाए।
