LAW'S VERDICT

हाईकोर्ट को गुमराह करना पड़ा भारी, 10 हजार का जुर्माना लगा, जमानत अर्जी भी हुई खारिज

नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी ने एक ही केस में लगाई थी 2 जमानत अर्जीयाँ 

जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग पर सख्त रुख अपनाते हुए एक आरोपी पर ₹10,000 का जुर्माना लगाया है। आरोपी ने एक ही मामले में दो जमानत अर्जी दाखिल की थीं, जिसे कोर्ट ने अनैतिक आचरण करार दिया। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस संदीप एन भट्ट की सिंगल बेंच ने कहा कि इस प्रकार का व्यवहार न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। अदालत के कीमती समय की बर्बादी हुई है और ऐसे मामलों में सख्ती से निपटना आवश्यक है। 

नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म का है आरोप 

यह मामला जबलपुर के पनागर थाना क्षेत्र के ग्राम सिंगौद निवासी सजना चौधरी से जुड़ा है। आरोपी पर आरोप है कि उसने शादी का झांसा देकर एक नाबालिग का अपहरण किया और फिर बाद में उसके साथ दुष्कर्म किया। 

सरकार के वकील ने किया खुलासा 

राज्य सरकार की ओर से पैनल अधिवक्ता हिमान्शु तिवारी ने कोर्ट को बताया कि आरोपी पहले भी एक जमानत अर्जी दाखिल कर चुका था। वह अर्जी एक दिन पहले ही वापस ली गई थी। उसी FIR और अपराध में यह दूसरी अर्जी भी दाखिल की गई थी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि आरोपी ने यह तथ्य कोर्ट से छिपाया कि उसकी पूर्व याचिका पहले लंबित थी या हाल ही में वापस ली गई है।

हाईकोर्ट ने अपनाया कड़ा रुख 

तथ्यों की जांच के बाद हाईकोर्ट ने आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी। साथ ही उसपर ₹10,000 का जुर्माना लगाया। यह राशि एक सप्ताह के भीतर हाईकोर्ट लीगल सर्विस अथॉरिटी में जमा करने का निर्देश आरोपी को दिए गए।

हाईकोर्ट का यह आदेश साफ संदेश देता है कि-

- अदालत से तथ्य छिपाना गंभीर अपराध माना जाएगा।

- एक ही मामले में बार-बार अर्जी लगाकर कोर्ट को गुमराह करना स्वीकार नहीं होगा। 

- न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग पर कड़ी कार्रवाई होगी।


हाईकोर्ट का आदेश देखें    MCRC-14157-2026

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