तीनों युवकों का आरोप- जैसा राजस्थान पुलिस बता रही, हकीकत उससे उलट, हाईकोर्ट ने CJM को ब्यान दर्ज करने कहा
जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राजस्थान पुलिस द्वारा तीन युवकों को भोपाल से जयपुर ले जाकर गिरफ्तार किए जाने के मामले में अहम आदेश पारित किए हैं। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीज़न के सामने पेश किये गए तीनों कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राजस्थान पुलिस के दावों को नाकारा। युवकों का दावा था कि हकीकत पुलिस के बयानों से एकदम उलट है। विरोधाभासी दावों के मद्देनजर बेंच ने तीनों युवकों के अलग-अलग बयान दर्ज कराने, संबंधित पुलिस अधिकारियों से शपथपत्र मंगाने और अगली सुनवाई पर सभी अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई अब 12 मई 2026 को होगी।
वसुंधरा राजे से जुड़ी वायरल न्यूज पर हुई थी गिरफ्तारी
यह पूरा मामला राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक विवादित न्यूज से जुड़ा है। इसी मामले में भोपाल साइबर क्राइम द्वारा तीन युवकों को गिरफ्तार किया गया था।
भाइयों और दोस्त ने हाईकोर्ट में दी चुनौती
तीनों अलग-अलग याचिकाएं भोपाल के खिजर खान ने अपने भाई बिलाल खान, उदय घेनघट ने अपने मित्र निखिल प्रजापति और अनाम अहमद ने अपने भाई इनाम अहमद की गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए दायर की हैं। याचिकाओं में कहा गया है कि 20 अप्रैल को गिरफ्तारी की गई थी और कार्रवाई की वैधानिकता पर सवाल उठाए गए हैं।
कोर्ट में पेश किए गए तीनों युवक
बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान तीनों युवकों को अदालत में पेश किया गया। राजस्थान पुलिस की ओर से अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रामस्वरूप शर्मा, एसीपी बलराम चौधरी सहित अन्य अधिकारी शामिल थे।
राजस्थान पुलिस का दावा 22 अप्रैल को हुई गिरफ्तारी
राजस्थान पुलिस की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने कोर्ट को बताया कि युवकों को अवैध रूप से हिरासत में नहीं रखा गया था। उन्हें 22 अप्रैल 2026 को दोपहर 1:10, 1:20 और 1:30 बजे गिरफ्तार किया गया तथा उसी दिन संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। उन्होंने बताया कि पहले पुलिस रिमांड मिला, बाद में न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया। युवकों को जयपुर की अदालत से जमानत मिल चुकी है, लेकिन जमानत बांड प्रस्तुत नहीं होने के कारण वे अभी भी हिरासत में हैं।
“गिरफ्तार नहीं किया, साथ आए थे”
राजस्थान पुलिस ने यह भी कहा कि युवकों को भोपाल से गिरफ्तार कर नहीं लाया गया था, बल्कि वे मध्यप्रदेश पुलिस अधिकारियों के साथ स्वयं जयपुर आए थे। हालांकि उन्हें जयपुर ले जाने की प्रक्रिया में कुछ अनियमितताएं पाई गई हैं, जिन पर सक्षम प्राधिकारी द्वारा कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
मध्यप्रदेश पुलिस ने CCTV फुटेज दी
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता बी.डी. सिंह ने 28 अप्रैल 2026 की एक चिट्ठी और कुछ सीसीटीवी फुटेज अदालत में पेश किए। उन्होंने कहा कि यही उपलब्ध प्रासंगिक फुटेज है। साथ ही भोपाल साइबर क्राइम ब्रांच के अधिकारी प्रमोद कुमार शर्मा और तेजराम सेन भी अदालत में मौजूद रहे।
युवकों ने पुलिस का दावा नकारा
तीनों युवकों ने अदालत में कहा कि राजस्थान और मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा जो घटनाक्रम बताया जा रहा है, वह वास्तविक घटनाओं के विपरीत है।
हाईकोर्ट के सख्त निर्देश
कोर्ट ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) को निर्देश दिया कि किसी अधिकारी को नियुक्त कर तीनों युवकों के अलग-अलग बयान दर्ज कराए जाएं। बयान में यह दर्ज किया जाए कि मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा संपर्क किए जाने से लेकर जयपुर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए जाने तक वास्तव में क्या हुआ।
बयान दर्ज होने के बाद युवकों को वापस जयपुर भेजने के आदेश दिए गए ताकि वे जमानत की शर्तें पूरी कर सकें।
DIG जयपुर और DCP भोपाल से हलफनामा
राजस्थान की ओर से बताया गया कि पूरा मामला जयपुर कमिश्नरेट के DIG Crime और भोपाल के DCP Crime के बीच मौखिक बातचीत से शुरू हुआ था। इस पर हाईकोर्ट ने दोनों अधिकारियों को निर्देश दिया कि पहली बातचीत से लेकर युवकों को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए जाने तक पूरे घटनाक्रम का विस्तृत शपथपत्र एक सप्ताह में दाखिल करें।
अगली तारीख 12 मई
कोर्ट ने कहा कि इस मामले में उपस्थित सभी अधिकारी अगली सुनवाई यानी 12 मई 2026 को भी अदालत में उपस्थित रहें। आदेश की प्रति संबंधित CJM को भेजने और पक्षकारों को प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए।
हाईकोर्ट का आदेश देखें WP-14955-2026
