LAW'S VERDICT

सुप्रीम कोर्ट ने जबलपुर की युवती को दी जमानत, कहा- हाईकोर्ट ने जल्दबाजी में खारिज की अर्जी

मदन महल थाने में दर्ज हुए गांजा के केस में गिरफ्तार की गई थी युवती 

जबलपुर। सर्वोच्च न्यायालय ने जबलपुर की एक युवती को राहत देते हुए एनडीपीएस एक्ट के मामले में जमानत देने का आदेश दिया है। युवती ने मदन महल थाना पुलिस पर गांजे के फर्जी केस में फंसाने के आरोप लगाए थे। मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट द्वारा जमानत अर्जी खारिज किए जाने पर असंतोष जताया। अदालत ने कहा कि जब हाईकोर्ट ने मामले में पुलिस से जांच रिपोर्ट तलब की थी, तब रिपोर्ट आने से पहले जमानत याचिका को जल्दबाजी में खारिज नहीं करना चाहिए था।

मदन महल थाने में दर्ज हुआ था मामला

जबलपुर निवासी खुशी कौर के खिलाफ मदन महल थाने में एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/20 के तहत गांजा रखने का मामला दर्ज किया गया था। युवती ने इस एफआईआर को चुनौती देते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने आरोपों को गंभीर मानते हुए मामले की जांच के आदेश तो दिए, लेकिन जमानत देने से इनकार कर दिया। इसके बाद युवती ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की।

पुलिस पर मारपीट और अवैध हिरासत के आरोप

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान युवती की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एस.के. गंगेले, अधिवक्ता प्रिया शर्मा और रितु गंगेले ने दलीलें पेश कीं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारियों ने युवती के साथ मारपीट की, उसकी अस्मिता से छेड़छाड़ की और अवैध रूप से हिरासत में रखा। वकीलों ने यह भी कहा कि सीसीटीवी फुटेज में साफ दिखाई देता है कि दो महिला पुलिसकर्मियों ने युवती को दर्ज गिरफ्तारी समय से पहले ही हिरासत में ले लिया था।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

शीर्ष अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट ने जांच रिपोर्ट मंगाने के बावजूद उसका इंतजार किए बिना जमानत अर्जी खारिज कर दी और होटल मालिक के बयान पर भरोसा कर लिया, जो उचित नहीं था। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी माना कि जब्त मादक पदार्थ की मात्रा इंटरमीडिएट (मध्यवर्ती) है। साथ ही आरोपी एक युवती है, जांच पूरी हो चुकी है और उसके खिलाफ कोई आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं है। इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने युवती को जमानत देने का आदेश दिया।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश देखें   Special Leave to Appeal (Crl.) No(s). 2705/2026

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