जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने वेट चोरी से जुड़े मामले में भोपाल के एक कपड़ा व्यापारी को राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने सर्च कार्रवाई के दौरान जमा किए गए 45.44 लाख रुपए की राशि वापस (रिफंड) करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच—जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल ने कहा कि जब व्यापारी ने सर्च के समय स्वयं कर चोरी स्वीकार करते हुए राशि जमा की थी, तो बाद में उसे एडवांस टैक्स बताकर रिफंड की मांग नहीं की जा सकती।
कपड़ा और यूनिफॉर्म व्यापार से जुड़ा है मामला
यह याचिका भोपाल स्थित में. इंद्रप्रस्थ यूनिफार्म्स के प्रोप्राइटर वैभव खंडेलवाल की ओर से दायर की गई थी। याचिकाकर्ता कपड़े और स्कूल यूनिफॉर्म के व्यापार से जुड़े हैं। वर्ष 2016 में मध्यप्रदेश वैल्यू एडेड टैक्स एक्ट, 2002 के तहत उनके व्यापारिक प्रतिष्ठान पर वाणिज्य कर विभाग ने सर्च कार्रवाई की थी। जांच के दौरान कथित टैक्स चोरी सामने आने पर व्यापारी ने 45.44 लाख रुपए कंपाउंडिंग राशि के रूप में जमा किए थे।
बाद में कम निकली कर देनदारी
याचिकाकर्ता का तर्क था कि बाद में हुई ब्लॉक असेसमेंट प्रक्रिया में वास्तविक कर देनदारी इससे काफी कम निकली। इसके बाद व्यापारी ने दावा किया कि उससे अतिरिक्त राशि जमा हो गई है, इसलिए उसे ब्याज सहित वापस किया जाए।
कोर्ट ने कहा- बाद में रिफंड का दावा स्वीकार नहीं
सुनवाई के दौरान मध्यप्रदेश सरकार और वाणिज्य कर विभाग की ओर से शासकीय अधिवक्ता रविंद्र दत्त पड़रहा ने पक्ष रखा। अपना फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि सर्च के दिन ही याचिकाकर्ता ने स्वयं डिमांड ड्राफ्ट तैयार कर भुगतान किया था। इसलिए बाद में उस राशि को एडवांस टैक्स बताकर रिफंड मांगना स्वीकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि स्वीकारोक्ति के साथ जमा की गई कंपाउंडिंग राशि को बाद में चुनौती देने का अधिकार नहीं बनता, इसलिए याचिका निराधार है और इसे खारिज किया जाता है।
हाईकोर्ट का आदेश देखें WRIT PETITION No. 7572 of 2019
