LAW'S VERDICT

सोम डिस्टलरीज केस: हाईकोर्ट में तीखी बहस, अब 23 मार्च को निर्णायक सुनवाई

जबलपुर। सोम डिस्टलरीज के लाइसेंस निलंबन मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में शुक्रवार को लंबी और अहम सुनवाई हुई। सुनवाई दोपहर 2:45 बजे डिवीजन बेंच का नियमित काम खत्म होने के बाद शुरू हुई और शाम तक चली, लेकिन बहस पूरी नहीं हो सकी। जस्टिस विवेक अग्रवाल की कोर्ट ने मामले की गंभीरता और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को देखते हुए इसे 23 मार्च 2026 को “टॉप ऑफ द लिस्ट” यानी सबसे पहले सुनने का आदेश दिया है।

याचिकाकर्ता की बड़ी दलीलें

सोम डिस्टलरीज की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ ने अपनी दलील में कहा कि शो-कॉज नोटिस (26 फरवरी 2024) उस लाइसेंस अवधि के लिए था, जो 31 मार्च 2024 को खत्म हो गई, इसलिए नोटिस स्वतः समाप्त माना जाना चाहिए। बाद में 2024-25 और 2025-26 के लिए नए लाइसेंस दिए गए, जिन पर पुराना नोटिस लागू नहीं हो सकता। एक साथ 8 लाइसेंस निलंबित करना प्राकृतिक न्याय के खिलाफ है। दो अलग-अलग कंपनियों को एक ही नोटिस देना कानूनी रूप से गलत बताया गया। याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा कि जिन लोगों को सजा हुई, वे एक्साइज एक्ट के तहत दोषी नहीं हैं, इसलिए उनके आधार पर लाइसेंस निलंबन गलत है।

आपराधिक मामले का भी उठा मुद्दा

याचिकाकर्ता का दावा रहा कि 3 दिसंबर 2023 को सेशन कोर्ट ने कंपनी से जुड़े कुछ लोगों को IPC की धाराओं 420, 467, 468, 471, 120-B में दोषी ठहराया गया। वहीं एक्साइज एक्ट की धारा 34(2) में दोषी ठहराए गए लोगों के नाम शो-कॉज नोटिस में स्पष्ट नहीं बताए गए 

नोटिस में मौजूद हैं नाम 

राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता हरप्रीत सिंह रूपराह ने दलील दी कि Santosh और Omprakash के नाम शो-कॉज नोटिस में मौजूद हैं ये लोग फर्जी परमिट से शराब परिवहन में शामिल थे कंपनी के डायरेक्टर, सुपरवाइजर और ट्रांसपोर्ट से जुड़े लोग खुद अपने रोल को अपील में स्वीकार कर चुके हैं। सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि याचिकाकर्ताओं के पास वैकल्पिक उपाय (Revision) का विकल्प मौजूद है, इसलिए सीधे याचिका उचित नहीं है।

सोमवार तक क्यों टली सुनवाई?

शुक्रवार की शाम 4:45 बजे तक बहस जारी रही, लेकिन श्री रूप्राह ने कहा कि उन्हें दलील पूरी करने के लिए और समय चाहिए। इस पर कोर्ट ने अगली सुनवाई 23 मार्च 2026 तय करके मामले को पहले नंबर पर सूचीबद्ध करने का आदेश दिया

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का असर

अपने शुक्रवार के आदेश में हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के 16 मार्च 2026 के आदेश के तहत प्राथमिकता से की जा रही है और जरूरत पड़ने पर डिवीजन बेंच से पहले सिंगल बेंच गठित करने पर भी विचार किया जाएगा। 

तीसरी बेंच के बाद सुको तक गया मामला 

इस मामले के ख़ास बात यह है कि हाईकोर्ट में इस मुकदमे को सुनने से जस्टिस विशाल मिश्रा और जस्टिस एसएन भट्ट से इंकार कर दिया था। इसके बाद चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा ने यह मामला जस्टिस विवेक अग्रवाल की बेंच में भेजा था। 5 मार्च 2026 को जस्टिस विवेक अग्रवाल ने अंतरिम राहत देने से इंकार किया। इसके बाद कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को फिर से सुनवाई के लिए हाईकोर्ट वापस भेज दिया। 

हाईकोर्ट का आदेश देखें    WP-4915-2026


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