जाति प्रमाण पत्र के मामले पर सिंगल बेंच का आदेश रद्द, डिवीज़न बेंच ने फिर सुनवाई करने कहा
जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने भोपाल के टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएनसीपी) के ज्वाइंट डायरेक्टर नीरज आनंद लिखार को बड़ी राहत देते हुए सिंगल बेंच के एकतरफा आदेश को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि बिना पक्ष सुने दिया गया आदेश कानून के खिलाफ है और मामले की फिर से सुनवाई जरूरी है।
डिवीजन बेंच ने अपनाया सख्त रुख
शुक्रवार को चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की बेंच ने कहा कि “प्राकृतिक न्याय का मूल सिद्धांत है कि किसी भी पक्ष को सुने बिना आदेश पारित नहीं किया जा सकता।” इसी आधार पर कोर्ट ने सिंगल बेंच का आदेश निरस्त (खारिज) किया और मामला फिर से सुनवाई के लिए वापस भेजा।
सिंगल बेंच में याचिका, पहली सुनवाई पर आदेश
नरसिंहपुर निवासी आदित्य ठाकुर ने याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि लिखार के भाई का जाति प्रमाण पत्र पहले ही उच्च स्तरीय जांच समिति द्वारा निरस्त किया जा चुका है। ऐसे में नीरज आनंद लिखार का जाति प्रमाण पत्र भी संदिग्ध/अवैध है। इस पर सिंगल बेंच ने 12 मार्च को हुई पहली सुनवाई पर ही आदेश देते हुए जाति प्रमाण पत्र की जांच के निर्देश दे दिए थे।
क्यों रद्द हुआ सिंगल बेंच का आदेश?
शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान लिखार की ओर से दी गईं दलीलें सुनकर डिवीज़न बेंच ने पाया कि पहली ही पेशी पर बिना लिखार का पक्ष सुने सिंगल बेंच ने आदेश दे दिया। यह आदेश एकतरफा (Ex-Parte) और अवैधानिक है। इसके मद्देनजर डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के फैसले को रद्द कर दिया।
अब मिलेगा पक्ष रखने का मौका
हाईकोर्ट की डिवीज़न बेंच ने निर्देश दिए हैं कि सिंगल बेंच पहले नीरज आनंद लिखार का पक्ष सुने। उसके बाद ही कानून के अनुसार नया फैसला दे। सिंगल बेंच के सामने अगली सुनवाई की तारीख 25 मार्च 2026 तय की गई है।
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