हलफनामे में जानकारी छिपाने के आरोप पर हाईकोर्ट सख्त, याचिका खारिज करने से इनकार
2023 में हुए विधानसभा चुनाव का है मामला
हाईकोर्ट में यह चुनाव याचिका बीजेपी उम्मीदवार कृष्णपति त्रिपाठी द्वारा दायर की गई है। उन्होंने 2023 के विधानसभा चुनाव में सेमरिया सीट से चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्हें 55,387 वोट मिले, जबकि अभय मिश्रा को 56,024 वोट मिले और वे 637 वोटों से जीत गए। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद 16 जनवरी 2024 को यह याचिका हाईकोर्ट में दाखिल की गई, जिसमें विधायक की जीत को निरस्त करने की मांग की गई है।
हलफनामे में जानकारी छिपाने के गंभीर आरोप
याचिका में मुख्य रूप से यह आरोप लगाया गया है कि अभय मिश्रा ने नामांकन के दौरान दिए गए शपथ पत्र (Form-26) में महत्वपूर्ण जानकारियां छिपाई हैं, जो कानूनन देना अनिवार्य होता है। याचिकाकर्ता का दावा है कि अभय मिश्रा के खिलाफ पहले कई आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं, लेकिन उन्होंने अपने हलफनामे में इनका खुलासा नहीं किया और “Not Applicable” लिख दिया। याचिका के साथ आरटीआई से प्राप्त दस्तावेज भी पेश किए गए हैं, जिनमें 9 आपराधिक मामलों का उल्लेख बताया गया है। कोर्ट ने इस आरोप को गंभीर मानते हुए कहा कि यदि यह साबित होता है तो यह “भ्रष्ट आचरण” (Corrupt Practice) की श्रेणी में आ सकता है।
बैंक का लोन भी छिपाने का आरोप
याचिका में यह भी कहा गया है कि अभय मिश्रा ने ICICI बैंक से लिए गए लोन की जानकारी छिपाई है। आरोप है कि करीब ₹23 लाख का लोन लिया गया था, जिसकी बकाया राशि लगभग ₹50 लाख से अधिक थी, लेकिन इसे हलफनामे में नहीं दिखाया गया। हालांकि प्रतिवादी ने कोर्ट में कहा कि यह लोन उनकी व्यक्तिगत नहीं बल्कि उनकी कंपनी का था और वे 2008 में कंपनी से अलग हो चुके थे। हाईकोर्ट ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह बचाव ट्रायल के दौरान देखा जाएगा और इस आधार पर अभी याचिका खारिज नहीं की जा सकती।
आय के स्रोत की जानकारी अधूरी
एक अन्य आरोप में कहा गया है कि अभय मिश्रा ने अपनी आय के स्रोत के रूप में “Private Limited Company से वेतन” तो बताया, लेकिन उस कंपनी का नाम और विवरण नहीं दिया। कोर्ट ने माना कि यह भी एक महत्वपूर्ण तथ्य है और इसकी जांच जरूरी है।
सरकारी ठेके से जुड़ा विवाद भी जांच के दायरे में
याचिका में यह भी आरोप है कि अभय मिश्रा का सरकारी विभागों जैसे PWD या रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के साथ अनुबंध था, जो चुनाव लड़ने के लिए अयोग्यता का आधार बन सकता है। प्रतिवादी ने इस आरोप को नकारते हुए कहा कि वे संबंधित कंपनी के डायरेक्टर नहीं हैं। कोर्ट ने कहा कि यह विवाद भी ट्रायल के दौरान ही स्पष्ट होगा।
हाईकोर्ट ने कहा- याचिका में आरोप हैं और तथ्य भी
कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि याचिका में पर्याप्त तथ्य और आरोप मौजूद हैं। यह मामला प्रथम दृष्टया (prima facie) सुनवाई योग्य है। इसे केवल तकनीकी आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस स्तर पर प्रतिवादी के बचाव (defence) को नहीं देखा जा सकता। केवल यह देखा जाएगा कि याचिका में सुनवाई के लिए पर्याप्त आधार है या नहीं।
आवेदन खारिज, अब होगा ट्रायल
आवेदक कृष्ण पति त्रिपाठी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आरके संघी और अधिवक्ता सिद्धार्थ कुमार शर्मा ने दलीलें रखीं। सुनवाई के बाद अपने आदेश में कोर्ट ने Order 7 Rule 11 CPC के तहत अभय मिश्रा की ओर से दायर आवेदन को खारिज करते हुए कहा कि यह याचिका न तो निराधार है और न ही परेशान करने के उद्देश्य से दायर की गई है। इसके साथ ही कोर्ट ने प्रतिवादी को 4 सप्ताह के भीतर अपना जवाब (Written Statement) दाखिल करने का निर्देश दिया है।
क्यों अहम है यह मामला?
यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि चुनाव के दौरान उम्मीदवार द्वारा दी गई जानकारी सीधे मतदाताओं के अधिकार से जुड़ी होती है। सुप्रीम कोर्ट भी कई बार कह चुका है कि:
- मतदाताओं को उम्मीदवार की पूरी जानकारी मिलनी चाहिए
- ताकि वे सही और सूचित निर्णय ले सकें
यदि किसी उम्मीदवार द्वारा जानकारी छिपाई जाती है, तो यह चुनाव को प्रभावित कर सकता है और उसकी वैधता पर सवाल उठ सकता है।
अब आगे क्या होगा?
अब इस मामले में ट्रायल होगा, जिसमें सभी आरोपों और सबूतों की जांच की जाएगी। अगर आरोप साबित होते हैं, तो विधायक की सदस्यता तक रद्द हो सकती है। फिलहाल इतना तय है कि 637 वोट से मिली जीत अब कोर्ट की कसौटी पर है और आने वाले समय में यह मामला राजनीतिक रूप से भी बड़ा असर डाल सकता है।
हाईकोर्ट का आदेश देखें ELECTION PETITION No. 8 of 2024
