एक दिन में 1.67 लाख मामले सुलझे, 6.28 अरब रुपए के दावे निपटे
जबलपुर। मध्यप्रदेश में वर्ष 2026 की पहली लोक अदालत में बड़ी सफलता मिली। पूरे प्रदेश में आयोजित लोक अदालत के दौरान एक ही दिन में 1.67 लाख मामलों का आपसी समझौते से निपटारा किया गया। इनमें अदालतों में लंबित 42,278 प्रकरण और प्री-लिटिगेशन के 1,25,353 मामले शामिल रहे। साथ ही करीब 6.28 अरब रुपए के दावों का भी निराकरण किया गया।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा ने लोक अदालत का वर्चुअल उद्घाटन किया। इस दौरान हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस विवेक जैन भी मौजूद रहे। ख़ास बात यह रही कि इस कार्यक्रम में प्रदेश के सभी जिला न्यायाधीश वर्चुअल माध्यम से जुड़े।
1618 बेंचों में हुई सुनवाई
लोक अदालत में मामलों की सुनवाई के लिए पूरे मध्यप्रदेश में कुल 1618 पीठों (बेंचों) का गठन किया गया। इनमें 8 बेंच उच्च न्यायालय की मुख्यपीठ जबलपुर तथा इंदौर और ग्वालियर खंडपीठों में बनाई गईं, जबकि 1610 बेंच जिला एवं तहसील न्यायालयों में गठित की गईं।
वरिष्ठ अधिवक्ताओं और अधिकारियों का रहा सहयोग
लोक अदालत के सफल आयोजन में कई वरिष्ठ विधि अधिकारियों और अधिवक्ताओं ने अहम भूमिका निभाई। इनमें सुलहकर्ता सदस्य संजय राम ताम्रकार और आदित्य अधिकारी, अतिरिक्त महाधिवक्ता हरप्रीत रूपराह, भारत सरकार के उप सॉलिसिटर जनरल सुयश मोहन गुरू, राज्य अधिवक्ता परिषद के चैयरमेन राधेलाल गुप्ता, उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के सचिव पारितोष त्रिवेदी, हाई कोर्ट एडवोकेट बार एसोसिएशन के सचिव निखिल तिवारी, सीनियर एडवोकेट्स काउंसिल के उपाध्यक्ष रवि शंकर जायसवाल, रजिस्ट्रार जनरल धरमिंदर सिंह, उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति की रजिस्ट्रार अर्चना सिंह, म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सदस्य सचिव सुमन श्रीवास्तव और उप सचिव अनिरुद्ध जैन शामिल रहे।
केस-1: 15 साल बाद पति-पत्नी में हुआ समझौता
लोक अदालत में एक भावनात्मक मामला भी सामने आया। उमरिया निवासी राजीव लोचन तिवारी ने अपनी पत्नी नेहा तिवारी से तलाक के लिए निचली अदालत में मामला दायर किया था। दोनों पिछले 15 वर्षों से अलग रह रहे थे और उनका बेटा मां के साथ रहता था। निचली अदालत द्वारा 26 जुलाई 2023 को मुकदमा खारिज किए जाने के बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा। लोक अदालत में समझाइश के बाद पति-पत्नी अपने बेटे के साथ फिर से साथ रहने को राजी हो गए।
केस-2: सड़क हादसे में मृत युवक के मुआवजे में 45 लाख की बढ़ोतरी
भोपाल में सड़क हादसे में 22 वर्षीय युवक जैद की मौत के मामले में भी लोक अदालत ने राहत दी। बरखेड़ी निवासी सायरा बेगम के बेटे जैद की मौत के बाद मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने 13.16 लाख रुपए का मुआवजा तय किया था। हालांकि जैद आयकरदाता था, लेकिन इसे मान्यता नहीं दी गई थी। इसके खिलाफ दायर अपील पर लोक अदालत में सुनवाई के दौरान मुआवजे की राशि में 45 लाख रुपए की बढ़ोतरी कर दी गई। आवेदकों की ओर से अधिवक्ता नितिन गुप्ता और अर्पणा नखरा ने पैरवी की।
