LAW'S VERDICT

महिला समेत 4 को सिविल जेल की सजा, हाईकोर्ट के आदेश पर भिंड कलेक्टर कराएंगे खेती

यथास्थिति के बाद जमीन बेचने का मामला, हाईकोर्ट ने सौदा किया निरस्त 

ग्वालियर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में यथास्थिति (Status Quo) के आदेश के बाद बेची गई जमीन का पूरा सौदा निरस्त कर दिया है। जस्टिस जीएस अहलूवालिया की बेंच ने मामले में दोषी पाई गई एक महिला समेत 4 को सिविल जेल की सजा सुनाई है। वहीं अदालत में भिंड के कलेक्टर को विवादित जमीनों का रिसीवर नियुक्त करके एक साल तक खेती करने के आदेश दिए हैं। खेती से मिलने वाली रकम को ट्रायल कोर्ट में जमा कराने कहा है।

हाईकोर्ट ने दिए थे यथा स्थिति के आदेश 

भिंड जिले के लहार तहसील के गंगेपुर गाँव की 2 जमीनों के मामले पर हाईकोर्ट ने  7 नवंबर 2023 को स्टेटस-क्वो बनाए रखने का अंतरिम आदेश दिया था। बाद में 14 अगस्त 2024 को भी यह आदेश जारी रखा गया। इसके बावजूद 6 दिसंबर 2023 को शिवरतन सिंह ने गंगेपुरा की सर्वे नंबर 79 (0.11 हेक्टेयर) जमीन स्मिता कुशवाहा को बेच दी। उसी दिन शिवरतन के भाई हरिमोहन सिंह ने भी सर्वे नंबर 80 (0.12 हेक्टेयर) की जमीन भी स्मिता कुशवाहा को ही बेच दी। हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश के बाद भी जमीन बेचे जाने के खिलाफ इसी जमीन से जुड़े पक्षकार रामस्वरूप कौरव और उनके बेटे ज्योतिन्द्र सिंह कौरव ने Order 39 Rule 2A CPC के तहत यह मामला हाईकोर्ट में दाखिल किया था।

नोटिस से बचने पर गिरफ्तारी वारंट

अदालत ने 8 अक्टूबर 2025 को प्रतिवादियों हरिमोहन सिंह, शिव रतन सिंह, नीतू कुशवाहा व 2 गवाहों को नोटिस जारी किए थे, लेकिन रिपोर्ट में सामने आया कि वे नोटिस लेने से बच रहे थे। इसके बाद कोर्ट ने 18 फरवरी 2026 को प्रतिवादी 1 से 5 के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिए। बाद में कुछ प्रतिवादी के पेश होने पर अदालत ने वारंट वापस लिए जबकि कुछ अन्य प्रतिवादियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया।

संपत्ति अटैच, कलेक्टर बने रिसीवर

हाईकोर्ट ने पाया कि विवादित संपत्ति का अभी तक डिक्री के अनुसार बंटवारा नहीं हुआ है, इसलिए यह तय करना संभव नहीं है कि किस हिस्से पर किसका अधिकार है। ऐसे में अदालत ने आदेश दिया कि विवादित संपत्तियों को अटैच किया जाए। साथ ही कलेक्टर भिंड को इन संपत्तियों का रिसीवर नियुक्त करके अदालत ने खेती कराने के आदेश दिए ताकि उससे मिलने वाली राशि मुकदमा जीतने वाले पक्षकार को मिल सके।  

आदेश के उल्लंघन पर सिविल जेल की सजा 

अदालत ने कहा कि प्रतिवादी शिवरतन ने खुद अपील में यथास्थिति का आदेश लिया था, लेकिन एक महीने के भीतर ही उसका उल्लंघन कर दिया। इस पर अदालत ने  शिवरतन सिंह, गवाह बने गयाप्रसाद कुशवाहा और उसके बेटे पुष्पेंद्र कुशवाहा  को 3 महीने की सिविल जेल की सजा सुनाई। वहीं जमीन खरीदने वाली स्मिता कुशवाहा को महिला होने के कारण डेढ़ माह के सिविल कारावास की सजा सुनाई गई।  सभी को 18 मार्च 2026 तक ट्रायल कोर्ट में सरेंडर करने का आदेश दिया गया है।

हरिमोहन सिंह को माना मास्टरमाइंड 

हरिमोहन सिंह ने विवादित जमीन बेचते समय अपनी अविवादित संपत्ति बचाने की कोशिश की और साथ ही नोटिस की तामील से भी बचने का प्रयास किया। रिकॉर्ड से हरिमोहन सिंह की भूमिका मुख्य साजिशकर्ता जैसी पाते हुए अदालत ने कहा कि उसका पक्ष रखने वाले आर.पी. सिंह अधिवक्ता स्वयं विवादित संपत्ति के सह-भागी और अपील में सह-अपीलकर्ता भी हैं। कोर्ट ने कहा कि जब एक पक्षकार स्वयं अधिवक्ता है और उसका करीबी रिश्तेदार भी हाईकोर्ट में वकालत करता है, तब उनसे अदालत के आदेशों के प्रति अधिक सम्मान की अपेक्षा की जाती है। कोर्ट ने 6 दिसंबर 2023 की बिक्री को अमान्य  घोषित करके हरिमोहन सिंह को आदेश दिया है कि खरीदार स्मिता कुशवाहा को एक सप्ताह में पूरा बिक्री मूल्य वापस करे। यह भुगतान चेक से करके उसका बैंक स्टेटमेंट अदालत में प्रस्तुत करने कहा गया है। ऐसा नहीं किया गया तो कोर्ट की अवमानना की कार्रवाई शुरू होगी।

राजस्व रिकॉर्ड सुधारने का आदेश

हाईकोर्ट ने कलेक्टर भिंड को निर्देश दिया कि राजस्व रिकॉर्ड से खरीदार स्मिता कुशवाहा का नाम हटाया जाए और जमीन की स्थिति पहले जैसी बहाल की जाए।

हाईकोर्ट का आदेश देखें  MCC-2141-2025

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