LAW'S VERDICT

धनकुबेर सौरभ शर्मा के पार्टनर शरद जायसवाल को हाईकोर्ट से फिर नहीं मिली जमानत, दूसरी अर्जी भी खारिज

मप्र हाईकोर्ट ने माना- संगठित आर्थिक अपराध है मनी लॉन्ड्रिंग केस, आरोपी के खिलाफ हैं पर्याप्त सबूत 



जबलपुर। मनी लॉन्ड्रिंग मामले में परिवहन विभाग के पूर्व कांस्टेबल सौरभ शर्मा के पार्टनर शरद जायसवाल को एक बार फिर हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने शरद की दूसरी जमानत अर्जी खारिज कर दी है। जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने साफ कहा कि यह मामला संगठित आर्थिक अपराध (Organized Economic Offence) से जुड़ा है। इसमें कई स्तरों पर अवैध लेन-देन और नेटवर्क शामिल हैं। आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। रिहा होने पर दोबारा अपराध करने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में आरोपी को इस स्टेज पर जमानत देना उचित नहीं है।

धनकुबेर कांस्टेबल से जुड़ा है मामला 

परिवहन विभाग के पूर्व  कॉन्स्टेबल सौरभ शर्मा से यह मामला जुड़ा हुआ है। उसकी मासिक आय मात्र 28 हजार रुपये थी, फिर भी उसने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपार संपत्ति अर्जित की। आरोप है कि उसने यह संपत्ति अपने परिजनों और करीबी सहयोगियों के नाम पर खड़ी की, जिसमें वर्तमान आरोपी शरद जायसवाल भी शामिल हैं। जांच में सामने आया कि भोपाल, इंदौर और ग्वालियर में कई महंगी संपत्तियां, करोड़ों के फिशरीज कॉन्ट्रैक्ट, पेट्रोल पंप, वेयरहाउस, स्कूल प्रोजेक्ट और यहां तक कि दुबई में करीब 150 करोड़ रुपये की विला भी इस नेटवर्क से जुड़ी हुई है। इसके अलावा “अविरल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड” नामक कंपनी के जरिए कथित काले धन को वैध बनाने की साजिश रची गई।

जांच में काली कमाई का खुलासा 

लोकायुक्त की 19 दिसंबर 2024 को की गई छापेमारी में सौरभ शर्मा के घर से 1.14 करोड़ रुपये नकद, सोने के जेवरात सहित कुल 3.86 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई। वहीं सह-आरोपी चेतन सिंह गौर के यहां से भी करीब 1.68 करोड़ रुपये नकद और 2.11 करोड़ रुपये की चांदी बरामद हुई। मामले में हवाला लेन-देन के भी संकेत मिले हैं, जिससे जांच और गहरी हो गई है। 

लोकायुक्त के बाद ED की एंट्री 

इस मामले में शुरूआती जांच लोकायुक्त ने की थी। लोकायुक्त में FIR दर्ज होने के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एंट्री हुई।  ED के अनुसार यह पूरा मामला “प्रोसीड्स ऑफ क्राइम” को छिपाने और वैध दिखाने का है, जो मनी लॉन्ड्रिंग की श्रेणी में आता है। जांच में यह भी सामने आया कि इस मामले में शेल कंपनियों के जरिए अवैध धन को वैध बनाने का खेल चल रहा था।

फरवरी 2025 से गिरफ्तार है शरद  

इस बहुचर्चित मामले में सौरभ शर्मा के पार्टनर शरद जायसवाल को 10 फरवरी 2025 को गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में जमानत का लाभ पाने दायर की गई पहली जमानत अर्जी 29 जुलाई 2025 को वापस लेने पर हाईकोर्ट से खारिज हुई थी। 

छापेमारी में बड़ी बरामदगी

- सौरभ शर्मा के घर से 3.86 करोड़ रुपए नकद
चेतन सिंह गौर के ठिकाने से 1.68 करोड़ रुपए नकद
एक कार से 11.60 करोड़ रुपए नकद और करीब 51 किलो सोना
इसके अलावा करोड़ों की चांदी और अन्य कीमती सामान

“मुझे जानकारी नहीं थी” – शरद का दावा खारिज

सुनवाई के दौरान शरद जायसवाल की ओर से दलील दी गई कि उसे इस कथित अपराध की जानकारी नहीं थी। वहीं ED की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता विक्रम सिंह ने इसका कड़ा विरोध किया। मामले पर 6 फरवरी को हुई लम्बी सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।


हाईकोर्ट का आदेश देखें   MCRC-42129-2025

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