मप्र हाईकोर्ट ने सरकार से माँगा जवाब, अब सुनवाई 31 को
जबलपुर | प्रदेश की अदालतों की सुरक्षा व्यवस्था पर तीखी टिप्पणी करते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़े शब्दों में जवाब देने के निर्देश दिए हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने हाल की घटनाओं का हवाला देते हुए कहा— “कोर्ट की दीवार गिरने से जज घायल हो रहे हैं, कोर्ट परिसर में बम फूट रहे हैं… आखिर सरकार इस मुद्दे पर गंभीर क्यों नहीं है?” चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह 31 मार्च तक अदालतों की सुरक्षा व्यवस्था पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करे।
कोर्ट ने कहा कि हाल की घटनाएं—
- जिला न्यायालय की दीवार गिरने से जज घायल होना
- जबलपुर कोर्ट परिसर में बम विस्फोट
ये घटनाएं दर्शाती हैं कि अदालत परिसरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर लापरवाही बरती जा रही है।
2016 से चल रही है सुनवाई
यह मामला नया नहीं है। जजों की सुरक्षा को लेकर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए वर्ष 2016 से एक जनहित याचिका पर लगातार सुनवाई की जा रही है। सरकार ने एक्शन टेकन रिपोर्ट पेश की थी, लेकिन हाईकोर्ट प्रशासन ने उसमें कई कमियां बताकर आपत्ति दर्ज की। मंगलवार को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से अधिवक्ता बीएन मिश्रा, जजेस एसोसिएशन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता केसी घिल्डियाल और राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता अनुभव जैन मौजूद रहे।
हाईकोर्ट प्रशासन ने खोली सुरक्षा की पोल
हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार नरेश एम सिंह द्वारा दाखिल रिपोर्ट में प्रदेश की अदालतों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चौंकाने वाले खुलासे सामने आए:
- 29 जिला न्यायालयों में चहारदीवारी ही नहीं
- 27 तहसील कोर्ट में बाउंड्री वॉल बेहद छोटी
- सिर्फ 5 जिला कोर्ट परिसरों में पुलिस चौकी
- 5 जिलों में जज और स्टाफ की सुरक्षा व्यवस्था नहीं
- 28 जिलों में जजों और उनके परिवार की सुरक्षा नाकाफी
ये आंकड़े प्रदेश की न्यायिक व्यवस्था की सुरक्षा स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
