LAW'S VERDICT

कोर्ट के आदेशों की मनमानी व्याख्या कर रहे अफसर, कारण ‘उन्हीं को पता’

छतरपुर एसडीओ राजस्व को निर्देश- एक हफ्ते में संशोधित आदेश पेश करो या हाजिर हो 

जबलपुर। राजस्व रिकॉर्ड में कथित गलत व्याख्या के आधार पर ‘राज्य’ के नाम से नामांतरण करने के मामले पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस विशाल मिश्रा की कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि एक सप्ताह के भीतर संशोधित आदेश रिकॉर्ड पर पेश नहीं किया गया, तो छतरपुर के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा। मामले की अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद होगी।

क्या है मामला?

छतरपुर के दलोन गाँव में रहने वाली याचिकाकर्ता आशा रानी, जीतेन्द्र देव और करुणेन्द्र देव ने यह मामला हाईकोर्ट में दाखिल किया है। उन्होंने 04 दिसंबर 2025 को एसडीओ राजस्व द्वारा पारित उस आदेश को चुनौती दी है, जिसके जरिए एक जमीन को सरकार के नाम पर दर्ज किया गया था। इस बारे में पारित आदेश में उल्लेख किया गया कि यह कार्रवाई 12 सितम्बर 2024 को हाईकोर्ट के एक फैसले  के अनुपालन में की गई है।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उक्त रिट याचिका में ऐसा कोई निर्देश पारित ही नहीं हुआ था। 12 सितम्बर 2024 के आदेश को उन्होंने रिट अपील में चुनौती दी थी।  03 जुलाई 2025 को डिवीजन बेंच ने निर्देश दिया था कि राजस्व अभिलेखों में किसी भी प्रकार का परिवर्तन करने से पहले सभी पक्षकारों को सुनवाई का अवसर दिया जाए।

बिना सुनवाई नाम हटाने का आरोप

याचिकाकर्ताओं का दावा है कि वे स्व. महिपाल सिंह के वैध उत्तराधिकारी हैं। जिस जमीन का नामांतरण सरकार के नाम पर किया गया, वह भूमि पंजीकृत विक्रय विलेख से खरीदी गई थी। आरोप है कि बिना सुनवाई के उनके नाम हटाकर राज्य का नाम चढ़ा दिया गया, जबकि निजी प्रतिवादी कथित रूप से अतिक्रमणकारी हैं।

सरकार ने कहा- यह bonafide गलतफहमी 

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से तुलिका गुलाटी ने पक्ष रखा।  एसडीओ (राजस्व), छतरपुर ने हलफनामा पेश कर कहा कि 04 दिसंबर 2025 का आदेश ‘बोनाफाइड गलतफहमी’ के कारण पारित हुआ। राज्य के उप महाधिवक्ता ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि नया संशोधित आदेश पारित किया जाएगा, जिसके लिए उन्हें एक सप्ताह का समय दिया जाए।

 कोर्ट ने कहा- ऐसे आदेश पहली बार नहीं जारी हुआ 

अपने आदेश में जस्टिस मिश्रा  ने टिप्पणी की कि यह पहली बार नहीं है जब रिट याचिकाओं के आदेशों की गलत व्याख्या कर ऐसे आदेश पारित किए गए हों। हालांकि, न्यायहित में एक सप्ताह का अंतिम अवसर दिया गया है।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि संशोधित आदेश समय पर प्रस्तुत नहीं किया गया, तो संबंधित एसडीओ को स्वयं उपस्थित होकर चूक का स्पष्टीकरण देना होगा।

हाईकोर्ट का आदेश देखें   WP-4700-2026

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