हाईकोर्ट ने कहा- मामला हजारों विस्थापितों से जुड़ा, फिर भी सरकार नहीं दिखा रही तत्परता
इंदौर। सरदार सरोवर परियोजना (SSP) के हजारों विस्थापित परिवारों को अब तक पंजीकृत मालिकाना हक न मिलने पर मप्र हाईकोर्ट ने कड़ी नाराज़गी जताई है। मामला बड़वानी, खरगोन, अलीराजपुर, धार के विस्थापितों के हक़ से जुड़ा हुआ है। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस अलोक अवस्थी की डिवीज़न बेंच ने कहा कि यह मामला प्राथमिकता से लिया जाना चाहिए था, लेकिन सरकार ने अपेक्षित तत्परता नहीं दिखाई। बेंच ने मप्र सरकार के ACS डॉ. राजेश राजोरा को 26 फरवरी 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से उपस्थित होकर धीमी प्रगति पर जवाब देने का निर्देश दिया है।
मामला क्या है?
याचिका उन विस्थापित परिवारों की ओर से नर्मदा बचाओ आंदोलन की मेधा पाटकर ने दायर की गई है, जो सरदार सरोवर बाँध से प्रभावित हैं। वर्ष 2002 में विस्थापितों को दिए गए प्लॉट आवंटन पत्रों का बिना स्टाम्प/रजिस्ट्रेशन शुल्क पंजीयन कराने, सर्वे कर स्पष्ट सीमांकन, नक्शा व टाइटल डीड जारी कराने, अवैध हस्तांतरण के मामलों में कार्रवाई करने और 6 माह की समयबद्ध कार्ययोजना व मासिक प्रगति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश राज्य सरकार को दिए जाने की प्रार्थना हाईकोर्ट से की गई है।
सरकार ने कहा- अभी 6 महीने और लगेंगे
मामले पर हुई सुनवाई के दौरान मेधा पाटकर ने अपना पक्ष स्वयं रखा। सरकार की ओर से दाखिल की गई रिपोर्ट में बताया गया कि 03 फरवरी 2026 को SOP बना और काम शुरू हुआ, जिसे पूरा होने में 6 माह लगेंगे। इस पर सख्त टिप्पणी करते हुए डिवीज़न बेंच ने कहा कि “दो माह में SOP भी नहीं बनी। यह अपेक्षित तत्परता नहीं है, जबकि मामला हजारों विस्थापितों से जुड़ा है।” कोर्ट ने फिर से डॉ. राजेश राजोरा को 26.02.2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से उपस्थित होकर धीमी प्रगति पर जवाब देने का निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट का आदेश देखें WP-35006-2024
