LAW'S VERDICT

विधायक प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

याचिका दाखिल करने का अधिकार साबित नहीं कर सके कांग्रेस नेता प्रदीप अहिरवार

जबलपुर। प्रदेश सरकार की नगरीय प्रशासन राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र को चुनौती देने वाली याचिका को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने वापस लेने के कारण खारिज कर दिया। बुधवार को जस्टिस विशाल मिश्रा की अदालत में सुनवाई के दौरान कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार अपना लोकस स्टैंडिंग (याचिका दायर करने का अधिकार) साबित नहीं कर सके। लंबी बहस के बाद लोकस के मुद्दे पर याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी गई, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

जाति प्रमाण पत्र पर उठाये थे सवाल  

प्रदीप अहिरवार की याचिका में दावा किया गया था कि एसडीओ, नागोद (जिला सतना) द्वारा 27 अक्टूबर 2018 को प्रतिमा बागरी के पक्ष में अनुसूचित जाति (SC) का प्रमाण-पत्र जारी किया गया था। याचिकाकर्ता का आरोप था कि महाकौशल, बुंदेलखंड और बघेलखंड के सतना, पन्ना, जबलपुर, सिवनी जिलों में बागरी जाति राजपूत समुदाय में आती है, जबकि निमाड़ और मालवा के उज्जैन, इंदौर, रतलाम, मंदसौर आदि जिलों में यह अनुसूचित जाति में शामिल है। इसी आधार पर याचिका में आरोप लगाया गया कि सतना जिले की निवासी होते हुए भी प्रतिमा बागरी ने अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित रैगांव विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीता।

शिकायत पर कार्रवाई नहीं

याचिकाकर्ता ने राज्य स्तरीय जाति प्रमाण-पत्र परीक्षण प्राधिकरण के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की थी। नियमों के अनुसार दो माह में निर्णय होना था, लेकिन कथित रूप से कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी आधार पर हाईकोर्ट से समयबद्ध निर्णय का निर्देश देने की मांग की गई थी।

सरकार ने उठाये याचिकाकर्ता पर सवाल 

सुनवाई के दौरान उप महाधिवक्ता विवेक शर्मा ने याचिका की ग्राह्यता पर आपत्ति जताई। अदालत ने याचिकाकर्ता से पूछा कि वे इस मामले में सीधे तौर पर कैसे प्रभावित हैं। संतोषजनक उत्तर न दे पाने पर याचिकाकर्ता की ओर से याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी गई। अदालत ने याचिका को वापस ली गई मानकर खारिज कर दिया, साथ ही उपयुक्त वैधानिक कार्यवाही की स्वतंत्रता प्रदान की।

हाईकोर्ट का आदेश देखें  WP-5948-2026

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