मप्र पुलिस वायरलेस टेंडर विवाद: हाईकोर्ट ने सरकार से 7 दिन में मांगा जवाब, 12 फरवरी को अगली सुनवाई
जबलपुर। मध्यप्रदेश में 26 जिलों के पुलिस वायरलेस नेटवर्क से जुड़े करोड़ों रुपये के टेंडर को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। दिल्ली स्थित मोबाइल कम्युनिकेशन इंडिया प्रा. लि. की याचिका पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से 7 दिन के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 12 फरवरी को होगी। मप्र हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच के सामने मंगलवार को दिल्ली की कंपनी की ओर से टेंडर प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए गए।
टेंडर प्रक्रिया पर गंभीर आरोप
याचिका में आरोप लगाया गया है कि मध्यप्रदेश पुलिस के लिए प्रस्तावित डिजिटल वीएचएफ (DMR) वायरलेस कम्युनिकेशन सिस्टम की टेंडर प्रक्रिया को संदिग्ध तरीके से संचालित किया जा रहा है। अब तक यह टेंडर 5 बार जारी और रद्द किया जा चुका है, और हर बार पात्रता व तकनीकी शर्तों में बदलाव किया गया।
याचिकाकर्ता नई दिल्ली की मोबाइल कम्युनिकेशन इंडिया प्रा. लि. के अनुसार, कंपनी को पांच में से तीन बार L-1 (सबसे कम बोलीदाता) घोषित किया गया, इसके बावजूद 21 जनवरी को पांचवां टेंडर बिना ठोस कारण निरस्त कर दिया गया। उसी दिन छठा टेंडर जारी कर दिया गया, जिसमें तकनीकी मानकों और लाइसेंस शर्तों को कथित तौर पर ढीला कर दिया गया।
सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ ने कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार के डीओपीटी (DoPT) द्वारा तय मानकों को नजरअंदाज किया जा रहा है। आरोप है कि नियमों में जानबूझकर बदलाव कर चीनी कंपनियों की टेंडर में एंट्री कराने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इसे सुरक्षा से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील मामला बताते हुए कहा कि पुलिस संचार प्रणाली में किसी भी तरह की ढिलाई गंभीर खतरा पैदा कर सकती है।
12 फरवरी पर टिकी निगाहें
इस पूरे मामले ने पुलिस वायरलेस सिस्टम जैसे संवेदनशील क्षेत्र में पारदर्शिता, निष्पक्षता और सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की निगाहें 12 फरवरी को होने वाली अगली सुनवाई पर हैं, जब राज्य सरकार को टेंडर रद्द करने और शर्तों में बदलाव को लेकर अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा।