जबलपुर में अभा अधिवक्ता परिषद द्वारा आयोजित की गई ‘न्यायपथ’ कार्यशाला
जबलपुर। शीघ्र एवं प्रभावी न्याय के उद्देश्य से अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद द्वारा शनिवार को “न्यायपथ” कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस जितेन्द्र कुमार माहेश्वरी ने कहा कि भारतीय न्याय व्यवस्था में मध्यस्थता का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। मध्यस्थता का मूल तत्व संवाद है और संवाद के माध्यम से ही विवादों का त्वरित समाधान संभव है। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता एक स्वैच्छिक प्रक्रिया है, जिसमें निष्पक्ष तीसरे पक्ष (मध्यस्थ) की सहायता से दोनों पक्ष आपसी सहमति से समाधान तक पहुँचते हैं। इस प्रक्रिया की प्रमुख विशेषताएँ स्वैच्छिकता, निष्पक्षता, गोपनीयता , खुला संवाद और आत्मनिर्णय हैं। भारतीय न्याय व्यवस्था मध्यस्थता की संरक्षक है। यदि पक्षकार आपसी सहमति से समाधान करते हैं तो न्यायपालिका उस प्रक्रिया को संरक्षण देकर त्वरित एवं प्रभावी न्याय सुनिश्चित करती है।
तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश Justice Sanjeev Sachdeva उपस्थित रहे।
“भारतीय संस्कृति में मध्यस्थता परंपरागत न्याय का माध्यम”: चीफ जस्टिस
ये भी रहे उपस्थित
कार्यशाला में मप्र हाईकोर्ट के प्रशासनिक न्यायमूर्ति विवेक रूसिया, न्यायमूर्ति आनंद पाठक, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय एस. अग्रवाल, भारत सरकार के अतिरिक्त महान्यायवादी सुनील जैन एवं अधिवक्ता परिषद के महासचिव विक्रम दुबे सहित अनेक विधि विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम में क्षेत्रीय संयोजक प्रदीप सिंह सैंगर, प्रांत महिला प्रमुख नीलम दत्त सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता एवं विधि विद्यार्थी उपस्थित रहे।

