जबलपुर। कभी दफ्तरों में महिलाओं के साथ होने वाला यौन उत्पीड़न “ऑफिस कल्चर” कहकर दबा दिया जाता था। शिकायत करने वाली महिला ही कटघरे में खड़ी कर दी जाती थी। लेकिन 1997 में एक ऐतिहासिक फैसले ने इस चुप्पी को तोड़ा और महिलाओं को मिला उनका संवैधानिक अधिकार।
यह फैसला था Vishaka v. State of Rajasthan, जिसे Supreme Court of India ने सुनाया। अदालत ने पहली बार साफ कहा कि कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न, महिलाओं के मौलिक अधिकारों -विशेषकर समानता और गरिमा का उल्लंघन है। यहीं से जन्म हुआ विशाखा गाइडलाइन्स का।
क्या हैं विशाखा गाइडलाइन्स?
1997 के इस ऐतिहासिक निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने तब तक के लिए दिशा-निर्देश जारी किए, जब तक संसद कोई कानून न बना दे। इन निर्देशों के तहत—
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हर संस्था में आंतरिक शिकायत समिति (Internal Complaints Committee – ICC) बनाना अनिवार्य किया गया।
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समिति की अध्यक्ष महिला हो और कम से कम आधी सदस्य महिलाएं हों।
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एक बाहरी सदस्य (NGO/सामाजिक कार्यकर्ता) शामिल किया जाए।
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शिकायत की गोपनीयता और समयबद्ध जांच सुनिश्चित हो।
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संस्थान कर्मचारियों को जागरूक करने के लिए प्रशिक्षण और नोटिस जारी करें।
बाद में इन्हीं गाइडलाइन्स के आधार पर 2013 में “कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम” लागू हुआ।
किन मामलों में कर सकती हैं शिकायत?
अगर कार्यस्थल पर इनमें से कोई भी व्यवहार हो, तो वह यौन उत्पीड़न की श्रेणी में आ सकता है—
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अशोभनीय या दोअर्थी टिप्पणियां
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गंदे या अपमानजनक मजाक
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अवांछित शारीरिक स्पर्श
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अश्लील मैसेज, इशारे या ईमेल
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पद या अधिकार का दुरुपयोग कर मानसिक दबाव
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प्रमोशन या नौकरी के बदले अनुचित मांग
याद रखिए “ना” का मतलब हमेशा “ना” ही होता है।
शिकायत कैसे करें?
अगर किसी महिला कर्मी के साथ उत्पीड़न होता है, तो वह—
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अपने संस्थान की आंतरिक शिकायत समिति (ICC) में लिखित शिकायत दे सकती हैं।
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National Commission for Women में शिकायत दर्ज करा सकती हैं।
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महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के ऑनलाइन पोर्टल She-Box पर भी शिकायत कर सकती हैं।
शिकायत सामान्यतः घटना के 3 महीने के भीतर की जानी चाहिए (विशेष परिस्थितियों में समय बढ़ाया जा सकता है)।
याद रखिए…
अधिकार की जानकारी ही असली ताकत है। चुप्पी तोड़ना कमजोरी नहीं, साहस हैऔर कानून आपके साथ है।
