LAW'S VERDICT

MNREGA टेक्निकल असिस्टेंट्स की सेवा समाप्ति आदेश रद्द, हाईकोर्ट ने दिए बहाली के आदेश


इंदौर |  
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MNREGA) के तहत संविदा पर नियुक्त टेक्निकल असिस्टेंट्स को बड़ी राहत देते हुए उनकी सेवाएं समाप्त करने से जुड़े 02 मार्च 2019 और 19 मार्च 2019 के आदेशों को अवैध करार देते हुए निरस्त कर दिया है। जस्टिस जेके पिल्लई की सिंगल बेंच ने 3 याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए सभी याचिकाकर्ताओं के खिलाफ की गई कार्रवाई को विधिसम्मत नहीं माना है।  

2010 से संविदा पर हो रही थी नियुक्ति

याचिकाकर्ता दुर्गा प्रसाद व अन्य की ओर से दाखिल 3 याचिकाओं में कहा गया था कि वर्ष 2010 में MNREGA के तहत टेक्निकल असिस्टेंट्स की संविदा नियुक्ति की प्रक्रिया अपनाई गई थी। विधिवत विज्ञापन, साक्षात्कार और चयन के बाद उन्हें नियुक्त किया गया और समय-समय पर सेवा विस्तार भी मिलता रहा। याचिकाकर्ताओं से चुनाव ड्यूटी सहित विभिन्न शासकीय कार्य भी कराए गए।

2019 में अचानक सेवा समाप्ति का आदेश

राज्य सरकार की ओर से 02/03/2019 और 19/03/2019 को आदेश जारी कर संविदा कर्मचारियों की सेवाएं 28/02/2019 के बाद न बढ़ाने के निर्देश दिए गए, जिसके आधार पर याचिकाकर्ताओं की सेवाएं समाप्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई।

हाईकोर्ट का अहम निष्कर्ष

हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति स्वीकृत और राज्य द्वारा अनुमोदित पदों पर हुई थी। विवादित आदेश इन पर लागू ही नहीं होते। याचिकाकर्ताओं की सेवा समाप्ति का निर्णय कानूनसम्मत नहीं है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट के Umadevi फैसले का हवाला देना इस मामले में गलत है, क्योंकि संविदा कर्मचारियों के मामले में असाधारण परिस्थितियों में राहत से इनकार नहीं किया जा सकता।

सेवा बहाली और बकाया वेतन के निर्देश

हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि सभी याचिकाकर्ताओं को उनके पदों पर पुनः बहाल किया जाए। याचिकाकर्ताओं को  नोशनल वेतन निर्धारण और बकाया वेतन सहित सभी परिणामी लाभ दिए जाएं। उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की दबावात्मक कार्रवाई न की जाए और सेवाओं का नियमन राज्य सरकार की नीति और सेवा नियमों के अनुसार किया जाए।  कोर्ट ने निर्देश दिए कि आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के 60 दिनों के भीतर सभी निर्देशों का पालन किया जाए।

नियमितीकरण पर कोई राय नहीं

हाईकोर्ट ने यह भी साफ किया कि इस फैसले में नियमितीकरण के मुद्दे पर कोई राय व्यक्त नहीं की गई है। यदि यह प्रश्न उठता है तो उसे कानून के अनुसार अलग से तय किया जाएगा।

हाईकोर्ट का आदेश देखें 

W.P. No. 5807/2019

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