जबलपुर। कोविड लॉकडाउन के दौरान की गई सीमांकन कार्रवाई को अवैध ठहराते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सतना जिले के तहसीलदार का आदेश निरस्त कर दिया है। जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने टिप्पणी की कि जब पूरा देश लॉकडाउन में ठहरा हुआ था और राजस्व न्यायालय नियमित रूप से कार्य नहीं कर रहे थे, तब सीमांकन की कार्रवाई कैसे कर ली गई? अदालत ने सीमांकन के आधार पर की गई नामांतरण कार्रवाई भी रद्द कर दी और मामले को विधि अनुसार नए सिरे से सीमांकन के लिए प्रशासनिक अधिकारियों के पास भेज दिया।
लॉकडाउन में हुआ था सीमांकन
सतना जिले की रघुराजनगर तहसील के ग्राम डेलौरा निवासी गुलाब बाई कुशवाहा ने याचिका दायर कर बताया कि धर्मेन्द्र गोयल के आवेदन पर तहसीलदार ने उनकी 1.207 हेक्टेयर भूमि का सीमांकन करा दिया। याचिकाकर्ता का आरोप था कि उन्हें न तो कोई नोटिस दिया गया और न ही सुनवाई का अवसर। तहसीलदार ने 1 दिसंबर 2020 को सीमांकन आदेश पारित किया। इसके खिलाफ एसडीओ (राजस्व) के समक्ष दायर आवेदन भी 10 जुलाई 2023 को खारिज कर दिया गया, जिसके बाद हाईकोर्ट में याचिका लगाई गई।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आदित्य शर्मा ने पक्ष रखा। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि कोविड काल में जब न्यायालयों का नियमित कामकाज प्रभावित था, उस समय सीमांकन जैसी कार्रवाई करना और संबंधित पक्ष को अनुपस्थित मान लेना न्यायसंगत नहीं है।
आदेश निरस्त, मामला वापस
हाईकोर्ट ने 1 दिसंबर 2020 का तहसीलदार आदेश और 10 जुलाई 2023 का एसडीओ (राजस्व) आदेश निरस्त कर दिया। साथ ही, प्रकरण को नियमानुसार पुनः सीमांकन कार्रवाई के लिए सक्षम प्रशासनिक प्राधिकारी को भेज दिया। इस फैसले को कोविड काल में की गई प्रशासनिक कार्रवाइयों की न्यायिक समीक्षा के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हाईकोर्ट का आदेश देखें WP-14724-2024
