जबलपुर। कई बार हम यह सोचकर चुप बैठ जाते हैं कि न्याय पाना मुश्किल है, या कोर्ट तक पहुंचना बहुत खर्चीला और जटिल है। लेकिन सच्चाई यह है कि भारतीय न्याय व्यवस्था इतनी मानवीय है कि एक साधारण चिट्ठी भी आपकी फ़रियाद बन सकती है। अगर आपके पास वकील नहीं है, पैसे नहीं हैं, या आप दूर-दराज के गांव में रहते हैं, तब भी आप एक साधारण पत्र लिखकर न्याय मांग सकते हैं।
क्या है “चिट्ठी से न्याय” की व्यवस्था
भारतीय संविधान की भावना को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया और विभिन्न हाईकोर्ट्स ने यह व्यवस्था विकसित की है कि यदि कोई नागरिक (विशेषकर गरीब, कमजोर या ग्रामीण क्षेत्र का व्यक्ति) एक पत्र या पोस्टकार्ड के माध्यम से अपनी समस्या अदालत को भेजता है, और उसमें किसी मौलिक अधिकार के उल्लंघन का संकेत मिलता है, तो अदालत स्वयं उस पत्र को याचिका (Petition) में बदल सकती है। इसे लेटर पेटिशन (Letter Petition) या पोस्टकार्ड पीआईएल (Postcard PIL) कहा जाता है।
किन मामलों में भेज सकते हैं चिट्ठी?
आप निम्न प्रकार के मामलों में हाईकोर्ट को पत्र लिख सकते हैं:
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ज़मीन से जबरन बेदखली
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पुलिस की बर्बरता या अवैध हिरासत
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मजदूरी, पेंशन या सरकारी योजना का लाभ न मिलना
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शिक्षा या स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित होना
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दलित, आदिवासी, महिला या बच्चे के साथ अन्याय
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पर्यावरणीय क्षति या सार्वजनिक संसाधनों की लूट
चिट्ठी कैसी हो?
सरल और स्पष्ट भाषा में अपनी बात लिखें। घटना की तारीख, स्थान और जिम्मेदार व्यक्ति/संस्था का नाम लिखें। यदि संभव हो तो दस्तावेजों की कॉपी संलग्न करें और चिट्ठी में अपना पूरा नाम, पता और संपर्क अवश्य दें।
इन पतों पर भेजें चिट्ठी
सुप्रीम कोर्ट के लिए
The Chief Justice of India
Supreme Court of India
Tilak Marg, New Delhi – 110001
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के लिए
The Chief Justice
High Court of Madhya Pradesh
Jabalpur (M.P.) – 482001
