LAW'S VERDICT

शराब के नशे में अफसरों से अभद्रता करने वाले आरक्षक की बर्खास्तगी सही

दो बार बड़ी और 19 बार छोटी सजाएं पाने वाले SAF के बर्खास्त आरक्षक की याचिका हाईकोर्ट से ख़ारिज  

ग्वालियर।  मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने उस आरक्षक की याचिका को खारिज कर दिया, जिस पर शराब के नशे में अपने अधिकारियों से अभद्रता करने के आरोप में नौकरी से बर्खास्त किया गया था। आरक्षक ने अपील ,  अभ्यावेदन और दया खारिज होने के आदेशों को चुनौती देकर फिर से नौकरी में बहाली की मांग की थी। जस्टिस आशीष श्रोती की अदालत ने अपने फैसले में कहा- बर्खास्त कर्मचारी को 2 बार बड़ी और 19 बार छोटी सजाएँ मिल चुकी हैं। ऐसे में उसकी बर्खास्तगी को अनुचित या सख्त नहीं माना जा सकता। 

SAF में हुई थी नियुक्ति 

गुना में रहने वाले याचिकाकर्ता काशीराम की नियुक्ति 18 नवंबर 1991 को आरक्षक के पद पर हुई थी और वह 29वीं बटालियन, विशेष सशस्त्र बल (SAF), दतिया में पदस्थ था। बाद में उसका तबादला गुना और फिर अशोकनगर किया गया। तत्पश्चात उसे राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल, रीवा में प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया।

ड्यूटी छोड़कर बैरक में गया, वापस आकर अभद्रता की 

काशीराम पर आरोप था कि 09 नवंबर 2018 को पीटी परेड के दौरान वह बिना अनुमति परेड छोड़कर बैरक में चला गया। सिविल ड्रेस में वापस आकर वरिष्ठ अधिकारी से दुर्व्यवहार किया। उसी दिन कंपनी मुख्यालय में नशे की हालत में शासकीय कार्य में बाधा डाली। 18 अप्रैल 2019 को पुनः नशे की हालत में सहकर्मियों से दुर्व्यवहार किया। प्रारंभिक जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए और 15 मई 2019 को आरोप-पत्र जारी किया गया। विभागीय जांच में आरोप सिद्ध पाए गए।

विभागीय जांच में मिला पूरा मौका 

अपने फैसले में अदालत ने कहा कि विभागीय जांच विधि-सम्मत तरीके से की गई, जिसमें याचिकाकर्ता को पर्याप्त अवसर प्रदान किया गया। उस पर लगे आरोप गंभीर प्रकृति के थे और पूर्व सेवा रिकॉर्ड भी प्रतिकूल था। बर्खास्तगी की सजा न तो अत्यधिक है और न ही असंगत। हाईकोर्ट ने कहा कि मामले में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है। बर्खास्तगी सहित सभी आदेशों को वैध मानते हुए याचिका निरस्त कर दी गई।


हाईकोर्ट का आदेश देखें  W.P.No. 22779/2021

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