मप्र हाईकोर्ट में तय होगा ठेके में शामिल होने की योग्यता का पैमाना
जबलपुर। सीधी–सिंगरौली रेल लाइन बिछाने के लिए जारी 2177 करोड़ रुपये के टेंडर को लेकर उठा विवाद अब मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की शरण में पहुंच गया है। चीफ जस्टिस संजिव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने केन्द्र सरकार सहित अन्य पक्षों को नोटिस जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि टेंडर अलॉटमेंट की पूरी प्रक्रिया अंतिम फैसले के अधीन रहेगी। मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च को तय की गई है।
अहम सवाल: अयोग्यता का आधार क्या... लंबित आपराधिक मामला या सजा ?
यह प्रकरण इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अदालत को यह तय करना है कि किसी टेंडर में भाग लेने वाली कंपनी को सिर्फ आपराधिक मामला लंबित होने के आधार पर अयोग्य ठहराया जा सकता है या केवल दोषसिद्धि (सजा) होने पर ही अयोग्य माना जाएगा? यह कानूनी व्याख्या भविष्य के बड़े सरकारी टेंडरों की पात्रता शर्तों पर भी प्रभाव डाल सकती है।
दिलीप बिल्डकॉन की याचिका
मामला भोपाल स्थित कंपनी दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। कंपनी का कहना है कि सीधी–सिंगरौली रेल लाइन का टेंडर रेलवे द्वारा जारी किया गया था, लेकिन उसकी टेक्निकल बिड इस आधार पर खारिज कर दी गई कि उसके खिलाफ दिल्ली में एक आपराधिक मामला लंबित है।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि जिस राजस्थान स्थित कंपनी को टेंडर देने की तैयारी की जा रही है — जीआर इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड — उसके खिलाफ भी सिक्किम में आपराधिक मामला चल रहा है। ऐसे में एक ही टेंडर में दोहरा मापदंड अपनाए जाने का सवाल उठाया गया है।
सुनवाई में कौन-कौन रहे मौजूद?
गुरुवार को हुई सुनवाई में याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ और संजय अग्रवाल, केन्द्र सरकार की ओर से डिप्टी सॉलिसिटर जनरल सुयश मोहन गुरु तथा जीआर इन्फ्रा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शशांक शेखर उपस्थित रहे।
अयोग्यता के पैमाने को लेकर बहस के दौरान बेंच ने अनावेदकों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए और स्पष्ट किया कि टेंडर प्रक्रिया पर आगे की कार्रवाई अदालत के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी।
