LAW'S VERDICT

जब्त अनाज सड़ न जाए, इसलिए 7 लाख की जमानत पर लौटाओ


1197 क्विंटल गेहूं की जब्ती पर हाईकोर्ट का बड़वानी कलेक्टर को आदेश 

इंदौर। 1197 क्विंटल गेहूं और 17.51 क्विंटल चावल की जब्ती को लेकर हाईकोर्ट ने बड़ा हस्तक्षेप किया है। जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की कोर्ट ने कलेक्टर, बड़वानी द्वारा 03.11.2025 को पारित जब्ती आदेश और स्पेशल जज (अत्याचार अधिनियम) द्वारा 10.01.2026 को पारित आदेश को निरस्त कर दिया है। साथ ही निर्देश दिए हैं कि शेष अनाज 7 लाख रुपये की जमानत पर याचिकाकर्ता को लौटाया जाए।

क्या है पूरा मामला?

याचिकाकर्ता जय इंटरप्राइजेज के मालिक मुकेश जैन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बड़वानी कलेक्टर द्वारा पारित जब्ती आदेश को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता पर आरोप था कि उसके पास सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) से प्राप्त अनाज पाया गया, जिसे खुले बाजार में बेचने की तैयारी थी।  प्रशासन के अनुसार जब्त अनाज की कुल कीमत लगभग 22,24,640 रुपये थी। हालांकि, सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि जब्त 1197 क्विंटल गेहूं में से 598.50 क्विंटल पहले ही याचिकाकर्ता को लौटाया जा चुका है, जबकि शेष अभी भी प्रशासन के पास रखा हुआ है।

याचिकाकर्ता की दलील

वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक शरन व अधिवक्ता अमित मित्तल ने कोर्ट में तर्क दिया कि गेहूं नाशवान वस्तु है। यदि इसे जल्द बाजार में नहीं बेचा गया तो वह न सिर्फ सड़ जाएगा बल्कि मानव उपभोग के लायक भी नहीं बचेगा। उन्होंने कहा कि पूरा स्टॉक विधिवत हिसाब में दर्ज है और केवल समान प्रकार के खाली बोरों के आधार पर झूठा प्रकरण बना दिया गया।

कोर्ट की अहम टिप्पणी

हाईकोर्ट ने कहा कि मामले में कई तथ्यात्मक विवाद हैं, जिनका अंतिम निर्णय साक्ष्य के आधार पर ही संभव है। लेकिन यदि अनाज लंबे समय तक पड़ा रहा तो वह पूरी तरह खराब हो सकता है, जिससे अपूरणीय क्षति होगी। इसी आधार पर कोर्ट ने दोनों आदेश रद्द करते हुए निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता 7 लाख रुपये की जमानत प्रस्तुत करे, जिसके बाद शेष अनाज उसे वापस सौंप दिया जाए।

हाईकोर्ट का आदेश देखें   WP-3381-2026

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