LAW'S VERDICT

भाई की मौत पर संदेह, लेकिन कोर्ट ने नहीं दी कब्र खुदाई की अनुमति



मप्र हाईकोर्ट बोला—चिकित्सकीय राय के बिना हत्या नहीं मानी जा सकती

जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि सिर्फ संदेह के आधार पर कब्र से शव निकालकर दूसरा पोस्टमार्टम कराने की अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने कहा कि ऐसा कदम केवल असाधारण और ठोस परिस्थितियों में ही उठाया जा सकता है। इसी आधार पर मृतक के भाई द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया गया। यह फैसला जस्टिस बी.पी. शर्मा की सिंगल बेंच ने उस याचिका पर सुनाया, जिसमें भाई की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का हवाला देकर दूसरा पोस्टमार्टम कराने के निर्देश मांगे गए थे।

क्या है पूरा मामला

याचिकाकर्ता कसीमुद्दीन कुरैशी ने बताया कि उनका भाई गयासुद्दीन कुरैशी नरसिंहपुर जिले के बोरीपार गांव का निवासी था। 26 मार्च 2025 को वह एक हादसे का शिकार हुआ और गंभीर हालत में जबलपुर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। अगले दिन 27 मार्च 2025 को इलाज के लिए उसे नागपुर ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम के बाद शव को दफना दिया गया।

याचिकाकर्ता का दावा था कि अस्पताल की डिस्चार्ज रिपोर्ट में मृतक के सीने में चोट का उल्लेख है, जिससे मौत को सामान्य नहीं माना जा सकता। इस आधार पर उन्होंने 10 नवंबर 2025 को जबलपुर एसपी को आवेदन दिया, लेकिन कार्रवाई न होने पर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पैनल अधिवक्ता विजय शुक्ला ने पक्ष रखा। कोर्ट ने कहा कि बिना ठोस चिकित्सकीय राय के मौत को हत्या नहीं माना जा सकता। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि मृतक की पत्नी द्वारा लगाए गए आरोप पहले से ही जांच के दायरे में हैं। कोर्ट ने माना कि मौजूदा तथ्यों में कब्र खुदवाकर दोबारा पोस्टमार्टम कराना न तो आवश्यक है और न ही न्यायसंगत। इसी निष्कर्ष के साथ याचिका खारिज कर दी गई।

क्यों अहम है यह फैसला

  • दूसरे पोस्टमार्टम की मांग पर हाईकोर्ट का स्पष्ट दिशा-निर्देश

  • संदेह मात्र को पर्याप्त आधार मानने से इनकार

  • न्यायिक संतुलन और सार्वजनिक हित पर जोर

यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए मिसाल माना जा रहा है, जहां केवल संदेह के आधार पर कब्र खुदाई और पुनः पोस्टमार्टम की मांग की जाती है।

WP-2016-2026

Post a Comment

Previous Post Next Post