एमपी हाईकोर्ट ने होटल को दी राहत, जांच का अधिकार प्रशासन के पास रहेगा
जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने होटल में हर्बल और फ्लेवर्ड हुक्का उपयोग को लेकर अहम फैसला सुनाया है। जस्टिस बीपी शर्मा की कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि हुक्का में तंबाकू, निकोटीन या कोई अन्य प्रतिबंधित पदार्थ नहीं है, तो प्रशासन होटल के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर सकता। यह फैसला राज्यभर के होटल, रेस्टोरेंट और हुक्का लाउंज के लिए एक महत्वपूर्ण नज़ीर माना जा रहा है।
यह आदेश संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दायर उस याचिका पर दिया गया, जिसमें जबलपुर की होटल मिड टाउन ने हर्बल उत्पादों से बने हुक्का के उपयोग की अनुमति देने के लिए मैंडमस रिट जारी करने की मांग की थी।
याचिकाकर्ता का तर्क
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता नमन मिश्रा ने दलील दी कि सार्वजनिक स्थानों पर तंबाकू युक्त हुक्का प्रतिबंधित है, लेकिन हर्बल हुक्का पर किसी कानून में रोक नहीं है। यह भी बताया गया कि इससे पहले भी अन्य होटलों और संस्थानों को हाईकोर्ट से राहत मिल चुकी है, जिन मामलों में निर्देश दिए गए थे कि बिना तंबाकू वाले हुक्का पाए जाने पर कोई कार्रवाई न की जाए। याचिकाकर्ता की ओर से आश्वासन दिया कि होटल में किसी भी प्रकार का प्रतिबंधित पदार्थ हुक्का में उपयोग नहीं किया जाएगा।
राज्य सरकार का पक्ष
राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता ने कहा कि प्रशासन की कार्रवाई केवल उन्हीं मामलों में की जाती है, जहां सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद (प्रतिषेध और विनियमन) अधिनियम, 2003 (COTPA Act) का उल्लंघन होता है।
हाईकोर्ट का आदेश
दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि यदि होटल में हर्बल और फ्लेवर्ड हुक्का ही उपयोग किया जा रहा है और उसमें तंबाकू या अन्य प्रतिबंधित पदार्थ नहीं हैं तो होटल के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित अधिकारी निरीक्षण (Inspection) करने के लिए स्वतंत्र रहेंगे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कानून का उल्लंघन न हो।
क्यों अहम है यह फैसला
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हुक्का लाउंज और होटल उद्योग को बड़ी राहत
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तंबाकू और हर्बल हुक्का के बीच स्पष्ट अंतर
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प्रशासनिक मनमानी पर नियंत्रण
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COTPA Act के दायरे को स्पष्ट किया