LAW'S VERDICT

मुकदमों की बाढ़ पर हाईकोर्ट सख्त: हर विभाग में ग्रिवांस मैकेनिज्म बनाने की सरकार को सलाह


सर्विस मैटर्स की बढ़ती संख्या पर मप्र हाईकोर्ट चिंतित, आदेश की प्रति मुख्य सचिव को भेजने के भी निर्देश

जबलपुर।  Madhya Pradesh High Court ने सर्विस मैटर से जुड़े मुकदमों की लगातार बढ़ती संख्या पर गहरी चिंता जताई है। जस्टिस विनय सराफ की सिंगल बेंच ने राज्य सरकार को सलाह दी कि कर्मचारियों की शिकायतों का निराकरण प्रारंभिक स्तर पर ही सुनिश्चित करने के लिए हर विभाग में प्रभावी शिकायत निवारण मैकेनिज्म (Grievance Redressal Mechanism) बनाया जाए।

अदालत ने कहा कि यदि विभागों में पर्याप्त अधिकारी उपलब्ध न हों तो सरकार सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीशों की सेवाएं लेकर उन्हें विभिन्न विभागों में नियुक्त कर सकती है। कोर्ट ने अपने आदेश की प्रति राज्य के मुख्य सचिव को भेजने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि इस सुझाव पर गंभीरता से विचार हो सके।

किस मामले में आया आदेश

ये निर्देश Mandla district में पदस्थ 7 फॉरेस्ट गार्ड कर्मचारियों (चौखीलाल यादव व अन्य) की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिए गए। याचिकाकर्ताओं ने 1 सितम्बर.2010 से सीनियरिटी और वेतन विसंगतियां दूर करने की मांग की थी। उनका कहना था कि इस विषय पर उच्च न्यायालय से लेकर Supreme Court of India तक दिशानिर्देश जारी हो चुके हैं, फिर भी उनकी समस्याएं नहीं सुलझाई जा रहीं। सुनवाई में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता वासु जैन ने पक्ष रखा।

कोर्ट ने कहा- कारणयुक्त आदेश पारित हो

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को 30 दिनों के भीतर विभाग के सक्षम अधिकारी के समक्ष प्रतिवेदन देने की स्वतंत्रता दी। साथ ही निर्देश दिया कि प्रतिवेदन मिलने के 45 दिनों के भीतर नियमों के अनुरूप कारणयुक्त (speaking) आदेश पारित किया जाए।

नीति बनाने की नसीहत

अपने आदेश में कोर्ट ने कहा कि ट्रांसफर, वेतनमान, इंक्रीमेंट, प्रमोशन, सीनियरिटी, नियमितीकरण, निलंबन और सेवा समाप्ति जैसे मामलों में कर्मचारी मजबूरी में हाईकोर्ट का रुख कर रहे हैं, जिससे न्यायालयों पर अनावश्यक बोझ बढ़ रहा है। यदि विभागीय स्तर पर ही कर्मचारियों के विवाद सुलझें तो समय, धन और संसाधनों की बचत होगी और इससे कर्मचारियों व सरकार, दोनों को राहत मिलेगी।

WP-1733-2026

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