LAW'S VERDICT

सामान खरीदने से पहले समझें गारंटी और वारंटी, फिर लड़ें अधिकार की लड़ाई



जबलपुर। 
 हर दिन हम कुछ न कुछ खरीदते हैं, जैसे मोबाइल सेट, घरेलू सामान, टीवी, पंखा, फ्रिज या कार। लगभग हर एक प्रोडक्ट में कंपनी गारंटी या वारंटी देती ही है। लेकिन अगर खरीदा गया सामान कुछ ही दिनों में खराब हो जाए तो क्या करें? यहीं पर आता है गारंटी और वारंटी का अधिकार, जो हर एक उपभोक्ताओं को सुरक्षा का अधिकार प्रदान करता है।

क्या है गारंटी और वारंटी में फर्क

गारंटी: यह निर्माता या विक्रेता की ओर से एक वादा होता है कि सामान एक निश्चित अवधि तक ठीक से काम करेगा। अगर उस दौरान खराबी आती है तो फ्री में मरम्मत, बदली या पैसा वापसी का विकल्प होता है।
वारंटी: यह भी एक प्रकार का वादा होता है, लेकिन इसमें आमतौर पर मरम्मत की गारंटी दी जाती है। कभी-कभी कुछ शर्तों के साथ रिप्लेसमेंट भी मिलता है, लेकिन रिफंड कम ही होता है।

क्या है कानून में उपभोक्ता का अधिकार

भारतीय उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, के तहत सही जानकारी पाने का अधिकार हर एक उपभोक्ता को दिया गया है। सभी प्रोडक्ट में गारंटी या वारंटी की पूरी और स्पष्ट जानकारी देना हर कंपनी की जिम्मेदारी है।

इन बातों का रखना होगा ध्यान

- प्रोडक्ट की खरीदारी के वक्त बिल और वारंटी कार्ड जरूर लें।
- खरीदारी के समय वारंटी की समय सीमा, शर्तें और कवर समझें।
- डीलर और कंपनी की जानकारी सुरक्षित करके रखें।

गड़बड़ी की कहां करें शिकायत:

यदि वारंटी में खराबी आई तो पहले कंपनी या विक्रेता को शिकायत करें। समस्या का समाधान न होने पर तो जिला, राज्य या राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग में मामला दर्ज करें। उपभोक्ता आयोग में मामला दाखिल करने के लिए किसी वकील की जरूरत नहीं होती। प्रत्येक ग्राहक खुद अपना केस दाखिल करके अपनी पैरवी कर सकता है।

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