सभी पेंशन अधिकारियों को कोर्ट की गाइडलाइन से अवगत कराएं राज्य के मुख्य सचिव
⚖️ क्या है पूरा मामला
याचिकाकर्ता जबलपुर के रोहिणी प्रसाद पटेल हैं, जो 31 जनवरी 2017 को सब-इंस्पेक्टर पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उनके खिलाफ रिटायरमेंट के बाद वसूली का आदेश पारित किया गया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई।
📌 कोर्ट की दो टूक
हाईकोर्ट ने कहा कि सेवानिवृत्त कर्मचारी से वसूली कानूनन अवैध है। क्लास-III और क्लास-IV कर्मचारियों से किसी भी परिस्थिति में रिकवरी नहीं की जा सकती। यदि कर्मचारी एक साल के भीतर रिटायर होने वाला है, तब भी वसूली पर रोक है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अंडरटेकिंग (undertaking) के नाम पर भी इस तरह की वसूली को जायज़ नहीं ठहराया जा सकता।
ब्याज सहित पैसा लौटाने का आदेश
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सचिन पांडेय की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने 12 जनवरी 2017 के रिकवरी आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही राज्य सरकार को निर्देश दिए कि यदि कोई राशि वसूल की गई है, तो उसे 60 दिनों के भीतर 6% वार्षिक ब्याज के साथ याचिकाकर्ता को वापस किया जाए।
पेंशन अधिकारियों पर नाराज़गी
कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि स्पष्ट कानून होने के बावजूद पेंशन भुगतान आदेश (PPO) जारी करते समय रूटीन में रिकवरी आदेश दिए जा रहे हैं, जिससे हाईकोर्ट में अनावश्यक मुकदमेबाज़ी बढ़ रही है।
मुख्य सचिव को निर्देश
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के वकील को आदेश की प्रति मुख्य सचिव को भेजने के निर्देश दिए हैं, ताकि:
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प्रदेश के सभी जिला पेंशन अधिकारियों को
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सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसलों से अवगत कराया जा सके
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भविष्य में इस तरह की अवैध वसूली और मुकदमेबाज़ी रोकी जा सके
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