स्टेटस रिपोर्ट पेश न करने पर एमपी हाईकोर्ट नाराज, अगली सुनवाई 3 फरवरी को
जबलपुर। सरकारी जमीन पर वर्षों से चले आ रहे अतिक्रमणों को हटाने में लापरवाही बरतने के मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। पूर्व आदेश के बावजूद स्टेटस रिपोर्ट पेश न किए जाने पर हाईकोर्ट ने रीवा कलेक्टर प्रतिभा पाल को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 3 फरवरी को दोपहर 3 बजे निर्धारित की गई है। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा एवं न्यायमूर्ति विनय सराफ की डिवीजन बेंच द्वारा पारित किया गया।
20 एकड़ सरकारी जमीन पर अतिक्रमण का आरोप
यह जनहित याचिका रीवा जिले के रायपुर कचुर्लियान तहसील अंतर्गत ग्राम पुरास निवासी अजय कुमार तिवारी द्वारा दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि गांव की लगभग 20 एकड़ शासकीय भूमि पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण किया गया है, लेकिन प्रशासन द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
2022 में दिए गए थे अतिक्रमण हटाने के निर्देश
याचिका के अनुसार, 10 मई 2022 को संभागायुक्त द्वारा अतिक्रमण हटाने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद न तो अतिक्रमण हटाए गए और न ही हाईकोर्ट के समक्ष स्थिति स्पष्ट की गई।
रिकॉर्ड जलाने और अवैध आवंटन के गंभीर आरोप
इस मामले में 17 अक्टूबर को हुई पिछली सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विजय कुमार शुक्ला ने आरोप लगाया था कि राजस्व अधिकारियों ने सरकारी जमीन से संबंधित पूरा रिकॉर्ड जला दिया और कई लोगों को अवैध रूप से भूमि का आवंटन कर दिया गया। इन गंभीर आरोपों को देखते हुए हाईकोर्ट ने सरकार को रिकॉर्ड गायब होने और अतिक्रमण की स्थिति पर स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे।
स्टेटस रिपोर्ट न देने पर कलेक्टर तलब
सोमवार को हुई ताजा सुनवाई में जब अनावेदकों की ओर से कोई स्टेटस रिपोर्ट पेश नहीं की गई, तो डिवीजन बेंच ने कड़ी नाराजगी जताते हुए रीवा कलेक्टर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश जारी कर दिए।
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