LAW'S VERDICT

निलंबन सजा नहीं, निष्पक्ष जांच के लिए प्रशासनिक कदम

 


पंचायत सचिव के निलंबन को चुनौती देने वाली याचिका इंदौर हाईकोर्ट से खारिज

इंदौर।

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट क्र इंदौर बेंच ने ग्राम पंचायत सचिव कैलाश पाठक द्वारा अपने निलंबन को चुनौती देते हुए दायर की गई रिट याचिका को खारिज कर दिया है। जस्टिस जेके पिल्लई की अदालत ने स्पष्ट किया कि निलंबन सजा नहीं,  बल्कि निष्पक्ष जांच के लिए उठाया गया एक प्रशासनिक कदम है। याचिकाकर्ता के खिलाफ पारित हुआ निलंबन आदेश न तो मनमाना है और न ही प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। गंभीर आरोपों की जांच के दौरान निलंबन एक प्रशासनिक और निवारक कदम है। इसे दंडात्मक कार्रवाई नहीं कहा जा सकता।

क्या था मामला

याचिकाकर्ता कैलाश पाठक की नियुक्ति 10 अक्टूबर 1998 को ग्राम पंचायत आसंधा, तहसील बड़ौद, जिला आगर-मालवा में पंचायत सचिव के पद पर हुई थी। उन्होंने कई वर्षों तक पंचायत प्रशासन में सेवाएं दीं।
याचिकाकर्ता का कहना था कि उन्हें पूर्व में भी दो बार निलंबित किया गया था, लेकिन दोनों ही मामलों में आरोप असत्य पाए जाने पर निलंबन समाप्त कर दिया गया। वर्ष 2019 के निलंबन को भी बाद में निराधार मानते हुए बहाल किया गया था।

हालांकि, 04 अक्टूबर 2023 को एक बार फिर उन्हें निलंबित किया गया। फर्जी पट्टा जारी करने,  भवन कर की अवैध वसूली कर राशि पंचायत खाते में जमा न करने और पद का दुरूपयोग करने के आरोपों में उसे निलंबित किया गया था। 

याचिकाकर्ता की दलील

कैलाश पाठक ने दलील दी कि निलंबन आदेश बिना विधिवत जांच के पारित किया गया। उसे न तो चार्जशीट दी गई और न ही जांच रिपोर्ट और जांच की पूरी प्रक्रिया उसके पीछे की गई थी। उसका यह भी आरोप था कि यह कार्रवाई सरपंच की दुर्भावना और अवैध गतिविधियों में सहयोग से इनकार का परिणाम है। इन आधारों पर  याचिकाकर्ता ने निलंबन आदेश और अपीलीय आदेश (दिनांक 13.03.2025) को निरस्त करने की मांग की थी।

राज्य सरकार का पक्ष

राज्य की ओर से कहा गया कि निलंबन से पहले विस्तृत जांच की गई थी और 05 सितंबर 2023 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। नोटिस में सभी आरोप स्पष्ट रूप से दर्ज थे और याचिकाकर्ता को जवाब देने के लिए पर्याप्त अवसर दिया गया, लेकिन उन्होंने जानबूझकर कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया।

हाईकोर्ट का निर्णय

हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ निलंबन आदेश अचानक या बिना प्रक्रिया के पारित नहीं किया गया। उसे कारण बताओ नोटिस जारी कर audi alteram partem (सुनवाई का अवसर) का पालन किया गया। अदालत ने माना कि लगाए गए आरोप अत्यंत गंभीर हैं, जो पंचायत प्रशासन की वित्तीय पारदर्शिता और सार्वजनिक विश्वास को प्रभावित करते हैं। ऐसे मामलों में निलंबन पूरी तरह न्यायसंगत है।

अंतिम आदेश

अदालत ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि इसमें हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता। हालांकि, याचिकाकर्ता को लंबित विभागीय जांच में पूरा अवसर मिलेगा और वे कानून के अनुसार अपना बचाव कर सकेगा।


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