कर्मचारियों के खिलाफ सीमेंट कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया की याचिका ख़ारिज
जबलपुर। एक ही नियोक्ता द्वारा अलग-अलग कर्मचारियों के खिलाफ दायर याचिकाओं पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने साझा आदेश पारित करते हुए स्पष्ट किया है कि ग्रेच्युटी का अधिकार सेवा समाप्ति की तारीख से उत्पन्न होता है, न कि आवेदन की तारीख से। जस्टिस विवेक जैन की अदालत ने कंट्रोलिंग अथॉरिटी और अपीलीय अथॉरिटी के आदेशों को सही ठहराते हुए नियोक्ता की सभी 4 याचिकाएं खारिज कर दीं।
क्या था मामला?
इन मामलों में कर्मचारियों की नियुक्ति वर्ष 1997 और 1999 में हुई थी और वे 2018 से 2021 के बीच सेवानिवृत्त हुए। ग्रेच्युटी के लिए आवेदन 2021–2022 में दायर किए गए थे, यानी सेवानिवृत्ति के 2–3 साल बाद। नियोक्ता ने तर्क दिया कि—
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कर्मचारी सीधे कंपनी के नहीं थे, बल्कि ठेकेदारों के माध्यम से नियुक्त थे।
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अनुबंध की शर्तों के अनुसार ग्रेच्युटी/टर्मिनल बेनिफिट्स का दायित्व ठेकेदार का था।
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देरी से दायर आवेदन सीमाबद्ध (लिमिटेशन) से बाधित हैं।
याचिकाकर्ता के रूप में Cement Corporation of India ने यह भी कहा कि कंपनी पर सीधे ग्रेच्युटी की जिम्मेदारी नहीं बनती।
हाईकोर्ट की अहम टिप्पणियां
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ग्रेच्युटी पर कोई लिमिटेशन नहीं: भुगतान ग्रेच्युटी अधिनियम, 1972 में आवेदन की कोई समय-सीमा तय नहीं है।
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देय तिथि सेवा समाप्ति से: ग्रेच्युटी सेवानिवृत्ति/त्यागपत्र/मृत्यु की तारीख से देय होती है और 30 दिन में भुगतान अनिवार्य है।
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प्रधान नियोक्ता की जिम्मेदारी: श्रम कानून कल्याणकारी (beneficial) प्रकृति के हैं। “वेतन” की व्यापक परिभाषा में रिटायरल बेनिफिट्स भी शामिल हैं। इसलिए प्रधान नियोक्ता भुगतान के लिए उत्तरदायी होगा—भले ही उसे बाद में ठेकेदार से वसूली का अधिकार हो।
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ब्याज अनिवार्य: देरी होने पर सेवा समाप्ति की तारीख से वास्तविक भुगतान तक साधारण ब्याज देना होगा, जब तक कि देरी कर्मचारी की गलती से न हो और उसके लिए पूर्व अनुमति न ली गई हो।
नतीजा
हाईकोर्ट ने कंट्रोलिंग अथॉरिटी व अपीलीय अथॉरिटी के आदेशों में हस्तक्षेप से इनकार किया। सभी याचिकाएं खारिज कर दी गईं। कर्मचारियों को जमा राशि निकालने की स्वतंत्रता दी गई है और यदि कोई कमी हो तो उसकी वसूली भी कर सकेंगे।
क्यों है यह फैसला महत्वपूर्ण?
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ठेका/आउटसोर्सिंग के मामलों में ग्रेच्युटी अधिकार को मजबूती।
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देरी से आवेदन करने वाले सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए राहत।
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नियोक्ताओं पर समय पर भुगतान और ब्याज की स्पष्ट जिम्मेदारी।
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