LAW'S VERDICT

अंबेडकर का अपमान: हाईकोर्ट ने पूर्व बार अध्यक्ष अनिल मिश्रा को दी जमानत, गिरफ्तारी को बताया अवैध

 

                               

                                 

                      

ग्वालियर।

डॉ. भीमराव अंबेडकर के चित्र को जलाने और अपमानजनक नारे लगाने के आरोप में गिरफ्तार किए गए हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ग्वालियर के पूर्व अध्यक्ष अनिल मिश्रा को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में अनिल मिश्रा की गिरफ्तारी को अवैध ठहराते हुए कहा कि गिरफ्तारी के समय उन्हें लिखित रूप से गिरफ्तारी के आधार नहीं बताए गए, जो कानून का गंभीर उल्लंघन है।

दिनभर चली सुनवाई के बाद आया फैसला

अनिल मिश्रा की याचिका पर 5 जनवरी को पूरे दिन सुनवाई चली थी, जिसके बाद डिवीजन बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। यह फैसला बुधवार को सुनाया गया। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति जी.एस. आहलूवलिया और न्यायमूर्ति आशीष श्रोती की खंडपीठ ने की।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: पुलिस को पहले से थी पूरी जानकारी

अपने विस्तृत आदेश में हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस को पहले से जानकारी थी कि याचिकाकर्ता अनिल मिश्रा IG पुलिस, ग्वालियर ज़ोन को ज्ञापन देने वाले हैं। साथ ही पुलिस जिला मजिस्ट्रेट द्वारा BNSS की धारा 163 के तहत जारी निषेधाज्ञा से भी भली-भांति अवगत थी। इसके बावजूद पुलिस ने न तो घटना को रोकने के प्रभावी प्रयास किए और न ही निषेधाज्ञा का सख्ती से पालन कराया।

संज्ञेय अपराध की जानकारी के बावजूद FIR में देरी

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि कथित घटना कन्हैयाढाना क्षेत्र में लगभग दोपहर 1:00 बजे हुई बताई गई। इसके बावजूद याचिकाकर्ता को शाम करीब 6 बजे कस्टडी में लिया गया FIR शाम 7:56 बजे दर्ज की गई और औपचारिक गिरफ्तारी रात 11:40 बजे, थाना पुरानी छावनी, ग्वालियर में दिखाई गई। बेंच ने माना कि FIR दर्ज होने से पहले ही याचिकाकर्ता पुलिस कस्टडी में था, जो कानूनन गंभीर सवाल खड़े करता है।

“आदेश सभी के लिए था, केवल याचिकाकर्ता के लिए नहीं”

डिवीजन बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट की मुख्यपीठ द्वारा 12 नवंबर को एक जनहित याचिका में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिया गया अंतरिम आदेश केवल अनिल मिश्रा के लिए नहीं बल्कि सभी नागरिकों के लिए था। पुलिस के पास इंटेलिजेंस इनपुट था कि ऐसी कोई घटना हो सकती है जिससे शांति भंग हो, फिर भी SSP और IG कार्यालय के सामने कथित घटना होने के बावजूद पुलिस द्वारा न तो उसे रोकने का प्रयास किया गया और न ही निषेधाज्ञा का प्रभावी क्रियान्वयन किया गया।

ORDER- W.P. No. 2 of 2026

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