LAW'S VERDICT

हत्या के लिए चोटों की संख्या नहीं, इरादा अहम होता है


सिर्फ एक वार के आधार पर नरमी की मांग, हाईकोर्ट ने अपील खारिज की

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने गुटका लाने के विवाद में युवक की हत्या के मामले में अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि हत्या के अपराध में चोटों की संख्या नहीं, बल्कि आरोपी का इरादा निर्णायक होता है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा के खिलाफ दायर अपील को खारिज कर दिया।

सिर्फ एक वार, लेकिन इरादा जान लेने का

यह फैसला जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस रत्नेश चंद्र सिंह बिसेन की डिवीजन बेंच ने सुनाया। बेंच ने स्पष्ट किया कि भले ही आरोपी ने छुरी से केवल एक ही वार किया हो, लेकिन यदि वह वार गले जैसे संवेदनशील हिस्से पर किया गया हो, तो इससे हत्या का इरादा साफ झलकता है।

क्या था पूरा मामला

भोपाल के कमला नगर थाना क्षेत्र अंतर्गत शबरी नगर झुग्गी बस्ती निवासी मुकेश विश्वकर्मा ने वर्ष 2017 में गुटका लाने की बात पर हुए विवाद में अंगूर सिंह के गले पर छुरी से वार कर उसकी हत्या कर दी थी।
इस मामले में भोपाल जिला सत्र न्यायालय ने 13 नवंबर 2017 को मुकेश विश्वकर्मा को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ आरोपी ने वर्ष 2018 में हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी।

अपील में क्या दी गई दलील 

अपील की सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से तर्क दिया गया कि विवाद अचानक हुआ था। मृतक को केवल एक ही चोट आई थी। आरोपी का हत्या का इरादा नहीं था।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

इन दलीलों को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा—

“आईपीसी की धारा 302 में सजा तय करने के लिए घावों की संख्या नहीं, बल्कि यह देखा जाता है कि वार किस हथियार से और शरीर के किस हिस्से पर किया गया। आरोपी घर से छुरी लेकर आया और सीधे गले पर वार किया, जिससे उसका इरादा स्पष्ट है।”

अपील खारिज, उम्रकैद बरकरार

अदालत ने यह मानते हुए कि आरोपी का उद्देश्य जान लेने का था, सत्र न्यायालय द्वारा दी गई उम्रकैद की सजा में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया और आरोपी की अपील को खारिज कर दिया। शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता बीके उपाध्याय हाजिर हुए।

CRA-7177-2018



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