अनुकंपा नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका हाईकोर्ट से खारिज
जबलपुर। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने एक अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि व्यक्तिगत रंजिश या पारिवारिक बदले के लिए जनहित याचिका (PIL) का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने छतरपुर जिले के एक शासकीय कर्मचारी की 36 वर्ष पुरानी अनुकंपा नियुक्ति को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया। यह आदेश चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने पारित किया। बेंच ने टिप्पणी की कि प्रस्तुत याचिका कोर्ट प्रायोजित और दुर्भावनापूर्ण प्रतीत होती है, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।
क्या था मामला
यह जनहित याचिका छतरपुर निवासी पत्रकार वेद प्रकाश चतुर्वेदी द्वारा दाखिल की गई थी। याचिका में बॉयज हायर सेकेंडरी स्कूल, हरपालपुर में अकाउंटेंट पद पर पदस्थ पुरुषोत्तम देव तिवारी को वर्ष 1989 में मिली अनुकंपा नियुक्ति पर सवाल उठाए गए थे।
याचिका में आरोप लगाया गया कि पुरुषोत्तम तिवारी के पिता का निधन वर्ष 1965 में हो गया था। बाद में फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाकर अनुकंपा नियुक्ति हासिल की गई।
सुनवाई में हुआ अहम खुलासा
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ब्रह्मदत्त सिंह ने याचिका की मंशा पर आपत्ति दर्ज कराई। बेंच ने याचिका के साथ संलग्न 36 साल पुराने दस्तावेजों को देखकर सवाल किया कि ये दस्तावेज याचिकाकर्ता के पास कैसे पहुंचे।
सवाल-जवाब के दौरान यह तथ्य सामने आया कि यह याचिका वास्तव में पुरुषोत्तम देव तिवारी के भाई देव नारायण तिवारी के इशारे पर दाखिल की गई है। याचिका में लगाए गए दस्तावेज देव नारायण तिवारी ने स्वयं आरटीआई के जरिए हासिल किए थे। पत्रकार को माध्यम बनाकर भाई के खिलाफ बदले की भावना से याचिका दायर कराई गई।
हाईकोर्ट का सख्त रुख
इस खुलासे के बाद डिवीजन बेंच ने कड़ा रुख अपनाते हुए याचिका वापस लेने की अनुमति देने से भी इनकार कर दिया और जनहित याचिका को सीधे खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि—
“जनहित याचिका का उद्देश्य निजी विवाद या पारिवारिक दुश्मनी निकालना नहीं है। ऐसे मामलों में पीआईएल का दुरुपयोग स्वीकार्य नहीं हो सकता।”
कानूनी दृष्टि से अहम फैसला
यह फैसला उन मामलों में नजीर माना जा रहा है, जहां निजी हितों को साधने के लिए जनहित याचिकाओं का दुरुपयोग किया जाता है।
