भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहां सम्मान के साथ जीना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। लेकिन जब इन अधिकारों की जानकारी नहीं होती, तब आम आदमी छोटी-छोटी बातों में भी बेवजह परेशान किया जाता है। आमतौर पर महिलाओं के खिलाफ अपराध तो दर्ज होते हैं, लेकिन उनको सूर्यास्त से लेकर सूर्योदय के बीच गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। आइए जानते हैं क्या है प्रकरण दर्ज होने के बाद गिरफ्तारी को लेकर महिलाओं के अधिकार-
👉क्या कहता है कानून
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 43(5) के अनुसार:
"किसी भी महिला को सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। यदि कोई अपराध गंभीर प्रकृति है और उसमें महिला आरोपी की गिरफ्तारी जरूरी है, तो सिर्फ और सिर्फ किसी महिला मजिस्ट्रेट की लिखित अनुमति प्राप्त करके ऐसी गिरफ्तारी की जा सकती है।"
👉इस नियम का उद्देश्य:
- महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना
- गिरफ्तारी की प्रक्रिया में उनकी गरिमा की रक्षा करना
- गिरफ्तारी के दौरान महिला का संभावित उत्पीड़न से बचाव करना
👉एक अपवाद यह भी
- महिला मजिस्ट्रेट की लिखित अनुमति के बाद भी किसी महिला को गिरफ्तार करने पहुंची पुलिस फोर्स में यदि महिला पुलिस कर्मी नहीं है, तब भी महिला की गिरफ्तारी नहीं हो सकती।
👉क्या करें यदि आपके साथ ऐसा हो?
- महिला होने के नाते यदि रात के समय पुलिस आपको गिरफ्तार करने आती है, तो आप उनसे लिखित अनुमति दिखाने को कह सकती हैं।
- आप अपने परिजनों या वकील को तुरंत सूचना दें।
- किसी भी अनुचित व्यवहार की स्थिति में राष्ट्रीय महिला आयोग या स्थानीय पुलिस अधीक्षक से शिकायत की जा सकती है।
👉याद रखें- अधिकार की जानकारी ही असली ताकत है।
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