LAW'S VERDICT

CBN को CDR की अनुमति न देना गंभीर नीति विफलता

 

एमपी हाईकोर्ट की इंदौर बेंच का केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार, NDPS मामलों की जांच पर उठाए सवाल

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स (CBN) को कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) प्राप्त करने की अनुमति दिए जाने पर केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के रवैये पर कड़ी नाराज़गी जताई है। न्यायालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आवश्यक अधिकारों के बिना किसी एजेंसी को बनाए रखना करदाताओं के पैसे की बर्बादी है।

यह टिप्पणी माननीय न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर ने सज्जन सिंह बनाम भारत संघ (MCRC No. 49997/2025) में पारित आदेश में की।


 मामला क्या है?

आवेदक सज्जन सिंह ने अपनी पहली जमानत याचिका धारा 483 BNSS, 2023 / धारा 439 CrPC के तहत दायर की थी। मामला क्राइम नंबर 1/2025, थाना CBN, जिला जावरा (मध्यप्रदेश) से जुड़ा है, जिसमें आरोपी पर NDPS Act की धारा 8, 28 और 30 के तहत आरोप हैं। आरोपी 13 जनवरी 2025 से जेल में बंद है।

CBN के अनुसार, आरोपी जिस खेत में काम करता था, वहां बने एक शेड से रासायनिक पदार्थ और उपकरण जब्त किए गए, जिनका उपयोग MDMA जैसे सिंथेटिक ड्रग के निर्माण में किया जाता है।


आरोपी की ओर से क्या दलील दी गई?

आवेदक के अधिवक्ता ने दलील दी कि

  • आरोपी से केवल Psychotropic substances बरामद हुए हैं, कोई Narcotic drug नहीं
  • आरोपी मात्र खेत में देखरेख और सिंचाई का काम करता था
  • भूमि और मकान सह-आरोपी मेहरबान सिंह के स्वामित्व में हैं
  • आरोपी के खिलाफ कोई आपराधिक इतिहास नहीं है

इस आधार पर आगे की हिरासत को अनावश्यक बताया गया।


CBN की आपत्ति

CBN की ओर से कहा गया कि

  • आरोपी के नियंत्रण वाले शेड से रसायन और उपकरण जब्त हुए
  • आरोपी की निशानदेही पर खेत में दबे हुए उपकरण भी बरामद किए गए
  • इस स्तर पर जमानत देने से जांच प्रभावित होगी

 CDR को लेकर कोर्ट का अहम सवाल

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने CBN से पूछा कि क्या आरोपी और सह-आरोपियों के CDR प्राप्त किए गए हैं

CBN ने अदालत को बताया कि

  • Information Technology Act, 2000 के तहत CBN को Law Enforcement Agency के रूप में अधिसूचित नहीं किया गया
  • इसी कारण केंद्र सरकार ने 24 अप्रैल 2025 के ऑफिस मेमोरेंडम द्वारा CBN का अनुरोध खारिज कर दिया
  • CBN ने 7 अगस्त 2024, 27 जनवरी 2025 और 3 जुलाई 2025 को कई प्रतिनिधित्व भेजे, लेकिन अब तक कोई निर्णय नहीं हुआ

 हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी

न्यायालय ने गृह मंत्रालय के रवैये को लेकर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा

यह न्यायालय गृह मंत्रालय के उस दृष्टिकोण से स्तब्ध है, जिसके तहत वित्त मंत्रालय के अधीन कार्यरत CBN को कानून प्रवर्तन एजेंसी मानने से इनकार किया गया है।

कोर्ट ने कहा कि

  • यह निर्णय अविवेकपूर्ण और अव्यावहारिक है
  • इससे CBN अधिकारियों का मनोबल गिरता है
  • CDR जैसे अहम साक्ष्य के बिना NDPS मामलों की प्रभावी जांच असंभव है

एजेंसी को अधिकार देना उसे निष्क्रिय बनाना

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया

यदि सरकार को अपने अधिकारियों की क्षमता पर संदेह है, तो उसे यह भी सोचना चाहिए कि सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स को जारी रखना आवश्यक है या नहीं। बिना अधिकारों के एजेंसी बनाना करदाताओं के धन की बर्बादी है।


जमानत आवेदन पर फैसला

अदालत ने— जमानत अर्ज़ी खारिज कर दी लेकिन आरोपी को यह स्वतंत्रता दी कि सीजर गवाहों के बयान के बाद पुनः आवेदन कर सकता है। साथ ही, CBN के अधिकारों से जुड़े मुद्दे पर केंद्र सरकार को शीघ्र निर्णय लेने की अपेक्षा जताई। 

MISC. CRIMINAL CASE No. 49997 of 2025



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