नई दिल्ली: दमोह जिले में एक ब्राम्हण युवक के पैर धुलवाने के बहुचर्चित मामले में आरोपी बनाए गए अनुज पांडे को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की युगलपीठ ने अनुज पांडे के खिलाफ दर्ज FIR और NSA की आपराधिक कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाते हुए उन्हें तत्काल रिहा करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट और राज्य शासन को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
अनुज पांडे की ओर से सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की गई थी। वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ ने दलील दी कि हाईकोर्ट ने एक वायरल वीडियो के आधार पर बिना समुचित जांच के एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दे दिए, जो कानूनन गलत है।
याचिका में बताया गया कि कथित पीड़ित व्यक्ति ने स्वयं पहले अनुज पांडे की तस्वीर में एआई तकनीक से जूतों की माला पहनाकर उसे सोशल मीडिया पर वायरल किया था। इसके बाद ही पूरे मामले को तूल दिया गया। याचिकाकर्ता का यह भी तर्क था कि संज्ञान याचिका 15 अक्टूबर को दर्ज हुई, जबकि हाईकोर्ट ने 14 अक्टूबर को ही एफआईआर दर्ज करने का आदेश पारित कर दिया था, जो प्रक्रिया की गंभीर अनदेखी दर्शाता है।
इसके अलावा दलील दी गई कि हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर आदेश अपलोड होने से पहले ही प्रशासन ने एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी कर ली, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है।
क्या था मामला: अनुज पांडे पर आरोप है कि उसने ओबीसी वर्ग के एक व्यक्ति को गांव के मंदिर में बुलाकर कथित रूप से उसके पैर धुलवाए और उस पानी को पीने के लिए मजबूर किया। इस मामले पर मप्र हाईकोर्ट द्वारा संज्ञान लेने के बाद प्रदेशभर में राजनीतिक और सामाजिक विवाद खड़ा कर दिया था।
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