LAW'S VERDICT

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का आरोप- वर्षों से हो रहा शोषण, अब तो मिले सरकारी कर्मचारी का दर्जा

म.प्र. आंगनवाड़ी कार्यकर्ता संघ की याचिका पर हाईकोर्ट का सरकार को नोटिस, माँगा जवाब 

जबलपुर। मध्यप्रदेश की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओ और सहायिकाओं को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। म.प्र. आंगनवाड़ी कार्यकर्ता संघटीकमगढ़ की राज्य महासचिव संगीता श्रीवास्तव ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सरकारी कर्मचारी का दर्जा, समान वेतन और सभी सेवा सुविधाएं देने की मांग की है। मामले पर जस्टिस विशाल धगट की अदालत ने सोमवार को याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मो. अली और अधिवक्ता अहमद साजिद हुसैन की दलीलें सुनकर राज्य सरकार व अन्य को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जवाब देने कहा है। अगली सुनवाई 17 फरवरी को होगी।

दशकों से सेवा, फिर भी अनदेखी

याचिका में कहा गया है कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं पिछले कई दशकों से मातृ-शिशु स्वास्थ्य, पोषण, टीकाकरण और सामाजिक कल्याण योजनाओं का संचालन कर रही हैं। इसके बावजूद राज्य सरकार ने आज तक इनके लिए नियमित कैडर का गठन नहीं किया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार इनसे स्थायी कार्य तो ले रही है, लेकिन अधिकार देने से बच रही है।

“समान काम के लिए समान वेतन” की मांग

संघ ने संविधान में निहित Equal Pay for Equal Work के सिद्धांत का हवाला देते हुए मांग की है कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को नियमित वेतन, वेतनवृद्धि, अवकाश, टी.ए., डी.ए., एच.आर.ए. सहित सभी लाभ दिए जाएं, जो एक नियमित सरकारी कर्मचारी को प्राप्त होते हैं।

अतिरिक्त काम थोपने के आरोप

याचिका में गंभीर आरोप लगाया गया है कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से बी.एल.ओ., जनगणना, चुनाव एवं अन्य गैर-निर्धारित कार्य कराए जा रहे हैं, जो कि सरकार द्वारा जारी परिपत्रों के विपरीत है। संघ ने इसे कर्मचारियों के अधिकारों का खुला उल्लंघन बताया है।

सरकार की गाइडलाइन भी कागजों तक सीमित

संघ का कहना है कि सरकार ने अपनी ही गाइडलाइन के भाग-3 और भाग-4 में सुविधाओं का आश्वासन दिया है, लेकिन आज तक उन्हें व्यवहार में लागू नहीं किया गया, जिससे आंगनवाड़ी कार्यकर्ता आर्थिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित हो रही हैं।
 

1 Comments

  1. Sabhi anganvadi worker or helper ko unka haq milna chahiye

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