इंदौर हाईकोर्ट ने मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी से माँगा जवाब
इंदौर। मप्र हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने उस मामले पर नोटिस जारी किये हैं, जिसमे मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी द्वारा गोल्ड मेडल के आवंटन को लेकर बनाये गए नियमें को कटघरे में रखा गया है। एमडी पीडिएट्रिक्स सीट में टॉप करने के बाद भी गोल्ड मेडल से वंचित हो रहे एक डॉक्टर की याचिका पर जस्टिस पवन कुमार द्विवेदी की अदालत ने मप्र सरकार के चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव, महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज इंदौर और मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी को जवाब पेश करने कहा है। मामले पर अगली सुनवाई 23 जनवरी को होगी।
रीवा में रहने वाले मयंक मोहन शर्मा की और से दाखिल इस याचिका में कहा गया है कि उन्होंने इंदौर के महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज से एमडी पीडिएट्रिक्स में टॉप किया है। पहले नियम था कि जो भी छात्र टॉप करेगा, वह गोल्ड मेडल का हकदार होगा। इसके लिए नम्बरों का कभी कोई पैमाना नहीं था। याचिका में आरोप है कि हाल ही में मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी ने एक आदेश जारी कर गोल्ड मेडल के लिए 75 फीसदी अंक तय कर दिए। याचिकाकर्ता का दावा है कि 10 कॉलेजों के 120 उम्मीदवारों के बीच उसने 74.37 अंक हासिल कर टॉप किया, फिर भी उसको गोल्ड मैडल से वंचित किया गया , जो अवैधानिक है।
मामले पर हुई प्रारम्भिक सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी व अधिवक्ता कमल तिवारी ने पक्ष रखा। याचिका में उठाये गए मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए अदालत ने अनावेदकों को जवाब पेश करने के निर्देश दिए।
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