LAW'S VERDICT

कांग्रेस विधायक चाह रहे थे मैहर में नहीं अमरपाटन में बने कलेक्ट्रेट भवन!

मैहर में ही बनेगा संयुक्त कलेक्ट्रेट भवन, चुनौती देने वाली जनहित याचिका खारिज 

जबलपुर। मैहर जिले में संयुक्त कलेक्टोरेट भवन को ग्राम धतूरा में बनाने के विरोध में दाखिल हुई जनहित याचिका वापस लेने पर हाईकोर्ट से खारिज हो गई है । याचिका में आरोप लगाया गया था कि प्रशासन ने जिले की लगभग 80 प्रतिशत आबादी की सुविधा को नजरअंदाज करते हुए एक दुर्गम, असंतुलित और अव्यवहारिक स्थान का चयन किया है। वहीं सरकार की याचिका पर आपत्ति थी कि  यह मामला राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है क्यूंकि कांग्रेस के एक स्थानीय विधायक चाहते हैं कि संयुक्त कलेक्टोरेट मैहर के बजाये अमरपाटन में बने। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीज़न बेंच ने मामले पर दखल देने से इंकार करके कहा कि यदि नई जगह पर निर्माण हो रहा है, तो इससे शहर का ही विकास होगा और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। 

मैहर के वकील प्रदीप तिवारी, आनंद कुमार श्रीवास्तव और समाजसेवी पुष्पेंद्र सिंह की और से दाखिल याचिका के अनुसार अमरपाटन, रामनगर, नादन और बेदरा जैसे दूरस्थ ग्रामीण अंचलों के लोगों को कलेक्टोरेट पहुंचने के लिए पूरे मैहर शहर को पार कर कटनी रोड की ओर जाना पड़ेगा, जिससे समय, दूरी और खर्च कई गुना बढ़ जाएगा। रात के समय सार्वजनिक परिवहन की कमी के कारण ग्रामीणों को मजबूरन मैहर में रुकना पड़ेगा, जिससे उनकी आर्थिक और मानसिक परेशानी बढ़ेगी। याचिकाकर्ताओं ने यह भी उजागर किया है कि अमरपाटन और रामनगर ब्लॉक में कुल 370 गांव, 1.24 लाख से अधिक अनुसूचित जाति-जनजाति आबादी और करीब 3.90 लाख की कुल जनसंख्या निवास करती है, जबकि प्रस्तावित स्थल कम आबादी वाले क्षेत्र में स्थित है। इसके बावजूद प्रशासन ने बहुसंख्यक आबादी की सुविधा की अनदेखी कर ग्राम धतूरा का चयन किया है। याचिका में आरोप था कि स्थानीय नागरिकों द्वारा कई बार ज्ञापन देने के बावजूद प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया। यहां तक कि विधायक डॉ. राजेंद्र कुमार सिंह द्वारा राज्यपाल को पत्र लिखे जाने के बाद भी सरकार ने निर्णय नहीं लिया, जिसके चलते अब यह मामला हाईकोर्ट की दहलीज तक पहुंच गया है।
बुधवार को याचिका पर हुई प्रारम्भिक सुनवाई में सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता हरप्रीत रूपराह और अधिवक्ता आकाश मालपानी हाजिर हुए। उन्होंने कहा कि स्थानीय कांग्रेस विधायक के इशारे पर यह जनहित याचिका  दाखिल हुई है।  सुनवाई के बाद बेंच ने याचिका में उठाये गए मुद्दे पर हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया। इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने याचिका वापस ले ली।  

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