SARFAESI Act पर इंदौर हाईकोर्ट ने दिखाया सख्त रुख
इंदौर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने SARFAESI Act, 2002 की धारा 14 के तहत लंबित मामलों में हो रही देरी और गलत प्रक्रिया पर कड़ी नाराजगी जताई है। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने स्पष्ट किया है कि धारा 14 के आवेदन पर उधारकर्ता (borrower) को नोटिस जारी करना कानून के खिलाफ है और इससे बैंक रिकवरी की प्रक्रिया अनावश्यक रूप से लंबी होती है।
क्या है पूरा मामला
याचिकाकर्ता (सिक्योर्ड क्रेडिटर) एयू फाइनेंस बैंक लिमिटेड ने अपर कलेक्टर, मंदसौर द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया को चुनौती दी थी। आरोप था कि धारा 14 के आवेदन पर उधारकर्ता को नोटिस जारी कर मामला अगस्त 2025 से लंबित रखा गया, जबकि कानून इसकी अनुमति नहीं देता। हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य में कई जिलों में कलेक्टर/अपर कलेक्टर धारा 14 के मामलों को मेरिट पर सुनवाई जैसा मानकर नोटिस जारी कर रहे हैं, जो कि SARFAESI Act के उद्देश्य के विपरीत है। धारा 14 की कार्यवाही विशेष प्रशासनिक प्रकृति की है, न कि न्यायिक सुनवाई जैसी।
Equitas केस का हवाला
अपने फैसले में जस्टिस शुक्ला और जस्टिस अवस्थी की डिवीजन बेंच ने पूर्व में पारित हो चुके एक निर्णय Equitas Small Finance Bank Ltd. बनाम राज्य शासन (23 नवंबर 2023) का हवाला देते हुए दो टूक कहा कि—
धारा 14 के आवेदन पर अधिकारी केवल दो बिंदुओं की जांच करेंगे: क्या संपत्ति उसी अधिकारी के क्षेत्राधिकार में है? क्या SARFAESI Act की धारा 13(2) का नोटिस दिया गया है? उधारकर्ता को नोटिस देना आवश्यक नहीं है।
कोर्ट के निर्देश
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अपर कलेक्टर/संबंधित अधिकारी को निर्देश दिया गया कि प्रमाणित प्रति प्रस्तुत होने के 10 दिन के भीतर आवेदन का निर्णय करें।
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राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव को भी आदेश दिया गया है कि यह आदेश सभी जिला कलेक्टरों और अपर कलेक्टरों को प्रसारित किया जाए, ताकि अनावश्यक देरी रुके, गलत प्रक्रियाएं बंद हों और हाईकोर्ट में बेवजह याचिकाओं की बाढ़ न आए।
क्यों है यह फैसला अहम
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बैंकों और वित्तीय संस्थानों को तेज रिकवरी प्रक्रिया मिलेगी
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प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा गलत नोटिस जारी करने की परंपरा पर रोक लगेगी
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SARFAESI मामलों में स्पष्ट गाइडलाइन स्थापित होगी
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