नई दिल्ली। डिजिटल युग में नागरिक स्वतंत्रता की सबसे मजबूत घोषणा के.एस. पुट्टास्वामी बनाम भारत संघ मामले में हुई। सुप्रीम कोर्ट की 9-न्यायाधीशों की पीठ ने सर्वसम्मति से कहा कि निजता संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य नागरिक के जीवन में मनमाने ढंग से हस्तक्षेप नहीं कर सकता। यह फैसला आधार, डेटा सुरक्षा, निगरानी और डिजिटल अधिकारों की दिशा तय करने वाला बना।
आज के तकनीकी दौर में यह निर्णय नागरिक बनाम राज्य शक्ति के संतुलन का सबसे मजबूत उदाहरण है।
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