LAW'S VERDICT

सिर्फ एक अंक से फेल हो रहा था मेडिकल छात्र, हाईकोर्ट ने पूछा- क्या बचाया जा सकता है एक साल?

ग्वालियर के छात्र की याचिका पर मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी के चांसलर से मांगा जवाब

लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़, जबलपुर।

सिर्फ एक अंक की कमी से मेडिकल छात्र का पूरा साल बर्बाद होने का संकट सामने आने पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लिया है। ग्वालियर के गजरा राजा मेडिकल कॉलेज (GRMC) के एमबीबीएस छात्र की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह की डिवीजन बेंच ने मध्य प्रदेश मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी के चांसलर से जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने पूछा है कि यदि छात्र मेधावी है और महज एक अंक की कमी के कारण उसका एक साल प्रभावित हो रहा है, तो क्या उसे एक अंक ग्रेस मार्क्स के रूप में देकर उसका साल बचाने का प्रावधान है? मामले में नोटिस जारी करते हुए कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 15 सितंबर 2026 की तारीख निर्धारित की है।

एक नंबर ने रोक दी आगे की पढ़ाई

ग्वालियर निवासी छात्र राम नरेश कुशवाहा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि वह गजरा राजा मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। छात्र वर्तमान में सेकंड प्रोफेशनल की नियमित कक्षाएं अटेंड कर रहा है। लेकिन प्रथम वर्ष में सिर्फ एक अंक की कमी के कारण उसके सामने आगामी परीक्षा में शामिल होने से रोके जाने का संकट खड़ा हो गया है।

याचिका में मांग की गई है कि संबंधित अधिकारियों को छात्र को ग्रेस मार्क्स देने के संबंध में उचित निर्देश दिए जाएं, ताकि महज एक अंक की कमी के कारण उसका शैक्षणिक वर्ष प्रभावित न हो।

हाईकोर्ट में उठा बड़ा सवाल- क्या मिल सकता है 1 अंक का ग्रेस?

गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता उत्कर्ष सोनकर और राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता जान्हवी पंडित उपस्थित हुईं। सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने मध्य प्रदेश यूनिवर्सिटीज कॉमन ऑर्डिनेंस नंबर-6 के क्लॉज 32 का प्रावधान रखा गया। बताया गया कि इस प्रावधान के तहत कुलाधिपति (चांसलर) को असाधारण और कठिन मामलों में ग्रेस मार्क्स देने की विशेष शक्ति प्राप्त है। इसी प्रावधान को देखते हुए हाईकोर्ट ने मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी के चांसलर से जवाब मांगा है कि क्या एक मेधावी छात्र का एक साल बचाने के लिए उसे एक अंक की अनुकंपा (ग्रेस) देने का कोई प्रावधान मौजूद है।

चांसलर को बताना होगा- नियम क्या कहते हैं?

हाईकोर्ट ने फिलहाल छात्र को सीधे एक अंक ग्रेस देने का आदेश नहीं दिया है। कोर्ट ने पहले यह जानना चाहा है कि संबंधित नियमों और चांसलर की शक्तियों के तहत ऐसी परिस्थिति में ग्रेस मार्क्स देने की अनुमति है या नहीं। अब मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी के चांसलर के जवाब के बाद मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

15 सितंबर को फिर होगी सुनवाई

डिवीजन बेंच ने मामले में नोटिस जारी करते हुए 15 सितंबर 2026 को अगली सुनवाई निर्धारित की है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि यूनिवर्सिटी की ओर से एक अंक ग्रेस देने को लेकर क्या जवाब प्रस्तुत किया जाता है।


हाईकोर्ट का आदेश देखें       WP-33341-2026

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