ओवेशन समारोह में नए सीजे बोले- आज भले ही बाहरी हूं, लेकिन इस कोर्ट का हिस्सा बनना चाहता हूं
लॉज़ वर्डिक्ट न्यूज़, जबलपुर।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के नवनियुक्त चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे ने कहा कि किसी भी अच्छे कोर्ट के लिए एक मजबूत और अच्छे बार की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। जज के पास ज्ञान और अनुभव होता है, लेकिन वकील कई बार ऐसे पहलुओं से अवगत कराते हैं, जो न्यायिक निर्णय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बार और बेंच दोनों ही पक्षकारों के हित में काम करते हैं।
चीफ जस्टिस कोगजे ने पदभार ग्रहण करने के बाद हाईकोर्ट के कोर्ट रूम नंबर-1 में आयोजित ओवेशन (स्वागत) समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि हर बार की अपनी एक परंपरा होती है। वे गुजरात हाईकोर्ट की समृद्ध परंपराओं से सीखकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की न्यायिक व्यवस्था को और बेहतर बनाने की दिशा में काम करना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “आज भले ही मैं बाहरी हूं, लेकिन मैं इस हाईकोर्ट का हिस्सा बनना चाहता हूं।” उन्होंने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की गौरवशाली न्यायिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस हाईकोर्ट ने जस्टिस एम. हिदायतुल्लाह, जस्टिस जीपी सिंह, जस्टिस जेएस वर्मा और जस्टिस आरसी लाहोटी जैसे देश के प्रतिष्ठित न्यायाधीश दिए हैं।
जस्टिस विवेक रुसिया ने किया स्वागत
समारोह की शुरुआत में जस्टिस विवेक रुसिया ने स्वागत भाषण दिया और नए चीफ जस्टिस का परिचय कराया। इसके बाद एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सुनील कुमार जैन, महाधिवक्ता प्रशांत सिंह, स्टेट बार काउंसिल की स्पेशल कमेटी के वाइस चेयरमैन दीपेंद्र सिंह कुशवाहा, मप्र हाईकोर्ट बार के अध्यक्ष मृगेन्द्र सिंह, हाईकोर्ट बार इंदौर के अध्यक्ष मनीष यादव, हाईकोर्ट बार ग्वालियर के अध्यक्ष पवन पाठक, हाईकोर्ट एडवोकेट्स बार के अध्यक्ष संजय अग्रवाल और सीनियर एडवोकेट्स काउंसिल के चेयरमैन उमाकांत शर्मा ने संबोधित किया। सभी वक्ताओं ने नए चीफ जस्टिस के कार्यकाल की सफलता और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
अच्छे कोर्ट के लिए अच्छे बार की जरूरत
चीफ जस्टिस कोगजे ने बार और बेंच के संबंधों पर जोर देते हुए कहा कि अच्छे कोर्ट के लिए सबसे ज्यादा जरूरत अच्छे बार की होती है। उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों के पास पर्याप्त ज्ञान और अनुभव होता है, लेकिन वकील उन्हें मामले के कई ऐसे अनजाने और महत्वपूर्ण पहलुओं से अवगत कराते हैं, जो न्याय की प्रक्रिया को बेहतर बनाते हैं। उन्होंने कहा कि बार और बेंच का उद्देश्य अलग-अलग नहीं, बल्कि एक ही है। दोनों पक्षकारों के हित में काम करते हैं और न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने में उनकी समान भूमिका है।
पक्षकार ही न्याय व्यवस्था का केंद्र
चीफ जस्टिस ने कहा कि न्यायपालिका की पूरी व्यवस्था के केंद्र में पक्षकार होते हैं। उनकी किसी भी स्थिति में अनदेखी नहीं की जा सकती। अदालतों में मुकदमों की संख्या भले ही सैकड़ों या हजारों में हो, लेकिन प्रत्येक मुकदमे के पीछे एक अलग कहानी और किसी व्यक्ति की उम्मीद जुड़ी होती है। उन्होंने कहा कि न्यायालयों को हर मामले को इसी दृष्टिकोण से देखना चाहिए कि उसके पीछे एक पक्षकार की समस्या, अधिकार और न्याय की अपेक्षा है।
जूनियर्स को मेहनत और ईमानदारी का संदेश
नए चीफ जस्टिस ने युवा और जूनियर अधिवक्ताओं को भी महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सफलता एक दिन में नहीं मिलती। इसके लिए लगातार कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि किसी मुकदमे में यदि विपरीत आदेश भी हो जाए तो जूनियर अधिवक्ताओं को हताश नहीं होना चाहिए। उन्हें अपने लक्ष्य की ओर लगातार मेहनत करते रहना चाहिए। साथ ही उन्होंने युवा वकीलों को किसी भी परिस्थिति में समझौता नहीं करने की सलाह दी।
चीफ जस्टिस कोगजे के इस संबोधन में बार-बेंच के बेहतर समन्वय, पक्षकारों को न्याय व्यवस्था के केंद्र में रखने और युवा अधिवक्ताओं को मेहनत व ईमानदारी के साथ आगे बढ़ने का संदेश प्रमुख रहा।
